पूर्वांचल में वजूद के लिए जूझ रहे वामदलों के लिए वाराणसी के बेनियाबाग मैदान में उमड़ी भीड़ संजीवनी बन पाएगी या नहीं, यह तो भविष्य बताएगा लेकिन अरसे बाद लाल सलाम के नारों के बीच लाल झंडों से पटे बेनियाबाग मैदान ने सियासी गलियारों में बनते-बिगड़ते समीकरणों और संभावनाओं पर नई बहस छेड़ दी है।आगे की स्लाइड्स में देखें..
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कार्यकर्ताओं की भीड़ से पार्टी के वरिष्ठ नेता गदगद दिखे तो वहीं, राजनीति के जानकारों ने भी इसे पूर्वांचल की सियासत में नए बदलाव का संकेत बताया।
दरअसल रविवार से इस मैदान में सीपीआई (एम) के 22वें राज्य सम्मेलन का आगाज हुआ है। सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी, प्रकाश करात और सुभाषिनी अली भी इस सम्मलेन में जुटे हैं।
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पूर्वांचल में अपनी खोई जमीन वापस पाने और लोकसभा चुनाव से पहले वाराणसी समेत आसपास के जिलों में संगठन को फिर पुरानी धार देने की तैयारी को रूप में इस सम्मेलन को देखा जा रहा है। तीन दशक पहले तक वाराणसी समेत पूर्वांचल के कई जिलों में कम्युनिस्ट संगठन का आधार काफी मजबूत हुआ करता था लेकिन उसके बाद से पार्टी की जमीन खिसकती चली गई।
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लाल सलाम के नारों के साथ सिर पे लाल टोपी और हाथों में झंडा लिए सभा स्थल पर पहुंचे कार्यकर्ता भी बेहद उत्साहित नजर आए। महासचिव बेनियाबाग के मैदान में आयोजित रैली में उमड़ी भीड़ से गदगद दिखे। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले राजनैतिक दलों के साथ मिलकर वैकल्पिक नीतियों पर विचार कर सांप्रदायिकता का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
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राज्य सम्मेलन के दौरान रैली को संबोधित करते हुए राज्यसभा की पूर्व सांसद एवं सीपीआई (एम) की पोलित ब्यूरो की सदस्य सुभाषिनी अली ने केंद्र और प्रदेश सरकार को किसान, मजदूर विरोधी बताया। गरीबों-किसानों से वादे तो सरकार ने किए लेकिन उसे पूरा करना भूल गई। कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि ऐसी सरकार को उखाड़ फेंकें।
केंद्र की आर्थिक नीतियों पर हमला बोलते हुए येचुरी ने कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार में 76 फीसदी जनता का धन देश के एक फीसदी अमीरों के हाथों में है। देश के अंदर केंद्र सरकार चमकता भारत और तरसता भारत की बुनियाद खड़ी कर रही है। पूंजीपति अमीर होते जा रहे हैँ और गरीब भूखों मर रहा है। पीएम मेक इन इंडिया, शाइनिंग इंडिया, डिजिटल इंडिया केसपने दिखा रहे हैं। इससे देश का भला नहीं होगा।