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ग्राउंड रिपोर्ट: पंचायतों में ‘सरकार’ बदलती रही पर तस्वीर नहीं बदली, सबूत हैं ये तस्वीरें

Tue, 13 Apr 2021 05:59 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
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गांवों में भरा पानी। - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में विकास के तमाम दावों के बीच गंगोह खादर के गांवों में आज भी ग्रामीण नारकीय जिंदगी जीने को मजबूर हैं। अधिकांश गांवों में जल निकासी बड़ी समस्या है। इसके चलते सड़कों ने गंदे पानी के तालाब का रूप ले रखा है। ग्रामीणों को इसी गंदगी के बीच होकर गुजरना पड़ता है। पेश है गंगोह खादर के गांवों पर एक रिपोर्ट...
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गांव में फैली गंदगी। - फोटो : amar ujala
कुंडा कलां से होती है संक्रामक रोगों की शुरुआत
हरियाणा की सीमा से सटे 20 हजार की आबादी वाले गांव कुंडा कला में हर तरफ गंदगी के अंबार लगे हैं। जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। ज्यादातर सड़कों पर जलभराव और कीचड़ की समस्या है। इनमें मच्छर पनपते रहते हैं। जनपद में संक्रामक रोगों के फैलने की शुरुआत सबसे पहले इसी गांव से होती है। हर साल बुखार और अन्य बीमारियों से कई लोग अकाल मौत का शिकार हो जाते हैं। गांव के मसरुर राणा, इलियास अहमद, इमरान, गुल्लू, इकबाल आदि का कहना है कि चुनाव में सफाई और जल निकासी बड़ा मुद्दा होता है। सभी प्रत्याशी जी का जंजाल बन चुकी इस समस्या से निजात दिलाने के वादे करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई सुध नहीं लेता।
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गांवों में भरा पानी। - फोटो : amar ujala
भेदभाव के शिकार हैं शाहपुरवासी
आठ हजार की आबादी वाली शाहपुर ग्राम पंचायत में उमरपुर मजरा भी जुड़ा है। ज्यादातर प्रधान उमरपुर से ही बनते हैं। शाहपुर वासियों की पीड़ा है कि उमरपुर से बनने वाला प्रधान उनके गांव की अनदेखी करता है। इसी कारण उनके गांव में आज तक कोई भी विकास कार्य नहीं हो सका। अधिकतर नालियां कच्ची हैं। आधा दर्जन गांवों सहित हरियाणा राज्य को जोड़ने वाले गांव से गुजर रहे मुख्य रास्ते पर बारह महीने पानी भरा रहता है। गांव में सफाई व्यवस्था भी पटरी से उतरी है। गांव के अनीश मल्लाह, इंतजार, मुंतजिर, इशाक आदि ने बताया कि उनके गांव में प्रधानी न आने के चलते भेदभाव बरता जाता है। गांव में जूनियर हाईस्कूल, बरातघर भी नहीं है जिसकी लंबे समय से मांग चली आ रही है।

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गांव में फैली गंदगी। - फोटो : amar ujala
आलमपुर की सभी सड़कें पड़ी हैं खस्ताहाल
नदी के किनारे बसे 10 हजार की मिश्रित आबादी वाली ग्राम पंचायत आलमपुर में सड़क सबसे बड़ा मुद्दा है। गांव की अधिकांश खस्ताहाल सड़कों में बड़े-बड़े गड्ढे बने हैं। हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। ऐसे में स्वच्छ पेयजल की भी बड़ी किल्लत है। स्ट्रीट लाइटें भी आज तक गांव में नहीं लगाई गई। ग्रामीण मांगेराम, सुनील सिंह, इकराम, आबिद आदि का कहना है कि पिछली बार भी इस उम्मीद के साथ वोट दिया था कि सड़कें सुधर जाएंगी लेकिन हालात जस के तस हैं।
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गांव में फैली गंदगी। - फोटो : amar ujala
मार्ग पर भरा रहता है नाली का पानी
ग्राम बिलासपुर की आबादी करीब 10 हजार है। इसके मुख्य मार्ग पर नालियों का गंदा पानी भरा है। इसी पर इंटर कॉलेज भी स्थित है। इसी रास्ते सैकड़ों छात्र-छात्राओं को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। अनुज कुमार, रोबिन सिंह, चौ. छत्रपाल सिंह, पंकज, रोबिन आदि ने बताया कि गांव में तालाब नहीं है जिस कारण गंदे पानी की निकासी नहीं हो पाती है। हैंडपंपों का पानी दूषित हो चुका है। लंबे समय से पानी की टंकी की मांग की जा रही है। गांव में स्ट्रीट लाइटें न होने से गलियों में अंधेरा पसरा रहता है।

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