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हमेशा जिंदा रहेंगी यादें: चौधरी अजित सिंह की हुंकार के आगे झुक गई थीं सरकारें, पढ़िए कब-कब क्या हुआ

Fri, 07 May 2021 02:13 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, जगेंद्र उज्ज्वल, मुजफ्फरनगर
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चौधरी अजित सिंह - फोटो : अमर उजाला
किसानों पर संकट आया तो चौधरी अजित सिंह राजनीतिक दूरियां भूलकर संघर्ष के मैदान में डटे नजर आए। 21 जनवरी 2008 में पंकज मलिक के समर्थन में होने वाली रैली में उन्होंने सरकार को सीधे चेतावनी दी और आठ अप्रैल 2008 में वह भाकियू संस्थापक चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के समर्थन में सीधे सिसौली पहुंच गए। सरकारों को उनकी हुंकार के आगे झुकना पड़ा।
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चौधरी अजित सिंह - फोटो : अमर उजाला
रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह की एक आवाज पर किसानों का सैलाब उमड़ पड़ता था। किसानों में उन्होंने कभी भी अपनी पकड़ को कमजोर नहीं होने दी। किसान हित पर चोट हुई तो वह सामने खड़े मिले। 2008 में तत्कालीन कांग्रेस विधायक पर डीडीओ के साथ मारपीट करने सहित कई मुकदमे बसपा की प्रदेश सरकार ने दर्ज करा दिए थे। इसके विरोध में पूर्व सांसद और पंकज मलिक के पिता हरेंद्र मलिक ने 21 जनवरी 2008 को जीआईसी के मैदान में रैली की थी। पंकज का साथ देने के लिए चौधरी अजित सिंह इस रैली में पहुंचे ही नहीं थे, बल्कि रात्रि में धरने का भी एलान कर दिया था।
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चौधरी अजित सिंह - फोटो : अमर उजाला
अजित सिंह की हुंकार का ही नतीजा था कि प्रदेश सरकार को बैकफुट पर आना पड़ा। हरेंद्र मलिक आज भी कहते हैं कि चौधरी अजित सिंह ने संकट के समय में हमारा साथ दिया। राजनीतिक मतभेद भुलाकर वह हमेशा किसानों के लिए खड़े मिलते थे। देश के किसानों को उनके जाने से अपूर्णीय क्षति हुई है।

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अजित सिंह - फोटो : अमर उजाला
अपने आप को अकेला मत समझना
दूसरी बड़ी घटना तब हुई जब भाकियू अध्यक्ष चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत पर अपशब्दों को लेकर मुख्यमंत्री मायावती ने मुकदमा दर्ज कराकर गिरफ्तारी के आदेश दिए। ऐसे हालात में चौधरी अजित सिंह सुबह सिसौली पहुंचे थे और महेंद्र सिंह टिकैत से कहा था कि अपने आपको अकेला मत समझना किसान समुदाय उनके साथ है।
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चौधरी अजित सिंह - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद आठ अप्रैल 2008 को किसान सम्मान बचाओ रैली हुई। इस रैली में उमड़ी भीड़ और चौधरी अजित सिंह की हुंकार के आगे सरकार को झुकना पड़ा। इस रैली में सपा नेता धर्मेंद्र यादव सहित कई बड़े नेता शामिल हुए थे। तीन साल पहले भाकियू की जब हरिद्वार से राजघाट तक निकलने वाली किसान क्रांति यात्रा को केंद्र सरकार ने दिल्ली बॉर्डर पर रोक कर राजघाट नहीं जाने दिया था, तब भी चौधरी अजित सिंह मौके पर पहुंचे थे। जब भी टिकैत परिवार के साथ कोई बात हुई तो चौधरी अजित सिंह उनके साथ खड़े नजर आए। किसान आंदोलन में भी वे उनके साथ दिखाई दिए और जयंत चौधरी को भाकियू की महापंचायतों में भेज कर इस बात को बताया कि वो किसानों और भाकियू के साथ है।

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