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देश से जुड़ी यादें: ...जब हार कर भी जीत गए थे चौधरी अजित सिंह, पढ़िए क्या थे आखिरी बोल...

Fri, 07 May 2021 12:14 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, रणवीर सैनी, मुजफ्फरनगर

सार

मुजफ्फरनगर जिले में हुए 2013 के दंगों के बाद से चौधरी अजित सिंह बेहद व्यथित थे। उन्होंने समाज में बनी खाई को पाटने का काम किया। अजित सिंह का ही किरदार था कि 2019 में मुस्लिम समाज के लोगों ने उनमें पूर्ण आस्था जताई।
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चौधरी अजित सिंह - फोटो : amar ujala
मुजफ्फरनगर जिले में हुए 2013 के दंगों के बाद से चौधरी अजित सिंह बेहद व्यथित थे। उन्होंने समाज में बनी खाई को पाटने का काम किया। अजित सिंह का ही किरदार था कि 2019 में मुस्लिम समाज के लोगों ने उनमें पूर्ण आस्था जताई। रिकॉर्ड मत पाने के बाद भी चुनाव में मात्र कुछ वोटों से हार हुई तो छोटे चौधरी ने कार्यकर्ताओं के बीच आकर उनका मनोबल बढ़ाया। चौधरी ने कार्यकर्ताओं से कहा था कि मेरा उद्देश्य लोगों में आपसी सौहार्द कायम करना था वह हो गया, यही मेरी जीत है।
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रालोद प्रमुख अजित सिंह, RLD chief Ajit Singh - फोटो : amar ujala
रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने राजनीति में अपनी अलग छवि बनाकर रखी। उन्होंने कभी भी धर्म और जाति के नाम पर लोगों को भड़काने का काम नहीं किया। 2013 के दंगे हुए और जिले में काफी संख्या में लोग मरे तो उनका मन व्यथित रहा।
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ajit singh chaudhary - फोटो : amar ujala
यह अजित सिंह का ही व्यक्तित्व था कि वह मुसलमान और जाट दोनों पक्षों के बीच पहुंचे। उन्होंने लोगों के बीच बनी खाई को दूर करने के लिए ही 2019 का चुनाव बागपत छोड़ मुजफ्फरनगर से लड़ने का निर्णय लिया।

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रालोद प्रमुख अजित सिंह, RLD chief Ajit Singh - फोटो : amar ujala
लोकसभा चुनाव में जाट समाज में भले ही दस-20 प्रतिशत बिखराव रहा हो, लेकिन मुस्लिम समाज एक तरफा उनको मिला। बावजूद इसके परिस्थितियों वश उनकी कुछ मतों से हार हुई। हार के बाद कार्यकर्ता हताश थे और मनोबल गिरा था, चौधरी 15 दिन बाद जिले में आए और उन्होंने तीन स्थानों बुढ़ाना, शहर के लोक निर्माण विभाग और पार्टी कार्यालय पर कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।
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श्रद्धांजलि: अजीत सिंह - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
उनका सबके लिए एक ही वाक्य था। हार-जीत राजनीति का हिस्सा है। मैं यहां आपसी सौहार्द के लिए आया था। सदियों से बने भाईचारे को कायम रखना मेरा उद्देश्य है मैं अपने मिशन में सफल हुआ हूं, यही मेरी जीत है।

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