फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह नहीं रहे, लेकिन उनकी यादें और बातें लोगों के जेहन में हमेशा जिंदा रहेंगी। दुनिया के सबसे तेज धावकों में शामिल पाक के मेजर अब्दुल खालिक को 1965 में भारत-पाक युद्ध में बंदी बनाकर मेरठ जेल लाया गया था। जेल में उन्होंने मिल्खा सिंह से मिलने की इच्छा जताई। जानकारी मिलते ही मिल्खा सिंह उनसे मिलने मेरठ जेल पहुंचे थे। दोनों एथलीट एक-दूसरे को गले लगाकर खूब रोए थे।
पाकिस्तान के अब्दुल खालिक दुनिया के तेज धावकों में शामिल रहे थे। वह मिल्खा सिंह के कड़े प्रतिद्धंदी भी थे। खालिक के एलानिया मुकाबले में दौड़ने के लिए मिल्खा सिंह लाहौर पहुंच गए थे। यहां खचाखच भरे स्टेडियम में मिल्खा सिंह ने खालिक को 200 मीटर दौड़ के मुकाबले में हरा दिया था। पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल अय्यूब ने तब उन्हें फ्लाइंग सिख की उपाधि दी थी।
बच्चों को देकर गए थे टिप्स
महान धावक मिल्खा सिंह बागपत के इंद्रप्रस्थ पब्लिक स्कूल काठा के वार्षिक समारोह में आए थे। उन्होंने बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अपने खेल जीवन के प्रसंग भी बच्चों को सुनाए थे।