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एक मां ऐसी भी: ऑनर किलिंग का शिकार हुए बेटे की प्रेमिका का किया कन्यादान, किसी फिल्म सरीखी है ये कहानी

Wed, 16 Jun 2021 08:47 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मृतक शैंकी का फाइल फोटो, उसके घर में मौजूद पड़ोस की महिला व तस्वीर लिए बैठी गमगीन मां - फोटो : amar ujala
एक तरफ संजीव की प्रेमिका उसकी मौत के गम में जीना ही भूल गई थी। एक तरफ मां, जो उसकी मौत के दर्द में बारहा बिखर रही थी। मां जिसने उसे न सिर्फ जन्म दिया था, बल्कि लाड़-प्यार से पाला था, तो दूसरी तरफ प्रीति (बदला हुआ नाम) जिसने संजीव के साथ न सिर्फ जीने-मरने की कसमें खाईं बल्कि उसे शिद्दत से चाहा भी, लेकिन अफसोस कि ये मोहब्बत मुकम्मल न हो सकी। लड़की के घरवालों ने संजीव की निर्मम हत्या कर दी।

प्रीति के सपने संजीव के साथ जलकर खाक हो गए, तो मां की दुनिया लुट गई। प्रीति ने अपना घरबार छोड़कर संजीव की मां का दामन थाम लिया। उन्हें सहारा देने के लिए उनके साथ रहने लगी। मां दर्द के दलदल में फंसी थीं लेकिन उन्होंने प्रीति को इससे निकाल दिया। उसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी ....। एक ऐसी कहानी जो फिल्मी नहीं वास्तविक दुनिया की है। उसका हर पहलू मार्मिक है। हर किरदार अनोखा है। एक लड़की है जो अपने प्यार को खोकर उसकी मां का हाथ थाम लेती है। एक बेमिसाल मां है जिसका फूल सा बेटा ऑनर किलिंग का शिकार हो गया। मां ने उसकी प्रेमिका को बेटी बनाकर कन्यादान किया। खुद दर्द के दलदल में धंस गईं लेकिन प्रीति की जिंदगी संवार दी। 
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बेटे की तस्वीर लिए बैठी गमगीन मां - फोटो : amar ujala
बचपन में ही उसके पिता गुजर गए। मां ने खून-पसीना एक कर अपने इकलौते लाल को पाला था। अपने हिस्से का उसे खिलाकर वक्त काटा। बेटा मां के संघर्ष को समझता था। बड़े होकर उसने भी उनके लिए कई अरमान सजाए लेकिन पूरे न कर सका। सारे सपने संजीव (शैंकी) के साथ जलकर खाक हो गए। मां की दुनिया लुट गई। सहारे की उम्र में अकेली रह गईं। दर्द ने उन्हें बिखेर कर रख दिया। एक और शख्स था जो इस गम में टूटा था।

संजीव की प्रेमिका जो उसकी मौत के बाद जीना भूल गई। एक ने संजीव को जन्मा था तो दूसरी ने शिद्दत से चाहा था। दोनों ने साथ जीने-मरने के ख्वाब देखे थे। अफसोस! कि उसके प्यार को मंजिल नहीं मिली। लड़की के घरवालों ने संजीव की हत्या कर दी।

 
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मृतक शैंकी का फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
प्रीति का जहां उजड़ गया लेकिन टूटकर भी उसने संजीव की मां का हाथ थाम लिया। उन्हें सहारा देने के लिए उनके साथ रहने लगी। मां दर्द के दलदल में फंसी थीं पर उन्होंने प्रीति को इससे निकाल दिया। उसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी। मां ने उसे बेटी की तरह अपनाकर उसका कन्यादान किया। रिश्तेदारी में उसकी शादी करा दी। खुद बेटे की स्मृतियों के आंगन में रह गईं। मां दर्द में घुल रही हैं।

जंधेड़ी, मवाना निवासी विरमवती समाज के लिए मिसाल हैं। 23 वर्षीय इकलौते बेटे को ऑनर किलिंग में खोने के बावजूद उन्होंने उसके प्यार को नई जिंदगी दी। प्रीति भी शैंकी की मां के प्रति समर्पित थी। घरवालों से बगावत कर उनके साथ रहने लगी। छह जुलाई 2019 को विरमवती ने अपनी रिश्तेदारी में उसकी शादी कर दी। मां की मर्मांतक पीड़ा है। मुख से निकले बोल दर्द में डूबे हैं। विरमवती अक्सर बीमार रहती हैं।

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पड़ोस की महिला व उसकी तस्वीर लिए बैठी गमगीन मां - फोटो : amar ujala
बताती हैं, शैंकी छह महीने का था, तभी उसके पिता का देहांत हो गया था। एक बेटी भी थी। पशु पालन और खेती कर मैंने बच्चे पाले। शैंकी सीधा-साधा बच्चा था। मैं सोचती थी कि पढ़ लिखकर कुछ बन जाए। अभी तो उसकी पालगत करके भी नहीं हटी थी। ये कहते हुए मां की रुलाई फूट पड़ती है। कुछ क्षण बाद बोलीं, शैंकी मेरठ में प्राइवेट जॉब करता था। वहीं रहता था। कंप्यूटर की कोचिंग भी कर रहा था। उसके प्यार के बारे में मुझे पता था। जाति अलग थी पर मैं शादी के लिए तैयार थी। शुरुआत में प्रीति के घरवाले भी तैयार थे। शैंकी उनके घर आता-जाता भी था। 

दिसंबर में हुई थी शैंकी की निर्मम हत्या  
शैंकी और प्रीति के पांच साल से प्रेम संबंध थे। 6 दिसंबर 2018 को शैंकी प्रीति से मिलने के लिए पल्लवपुरम स्थित उसके घर गया। वहां प्रीति के पिता और भाइयों ने उसकी हत्या कर दी। प्रीति शैंकी को छोड़ने की गुहार करती रही पर उन्होंने उसे कमरे में बंद कर दिया। हत्या कर शव को ललसाना के जंगल में ले जाकर कार समेत जला दिया गया। शैंकी के हत्यारोपी पिता-पुत्र जेल में हैं।
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मृतक शैंकी के घर में मौजूद पड़ोस की महिला - फोटो : amar ujala
बेटा! तेरे आगे पूरी जिंदगी पड़ी है
छह दिसंबर को घर से गया था। मैं बाहर थी। उसी दिन उसके साथ...। उसके जाने के बाद उम्मीद ही टूट गई। प्रीति जिद करने लगी कि मैं आपके साथ रहकर आपकी सेवा करूंगी। कुछ महीने मेरे पास रही। बाद में मैंने उसे समझाया कि बेटा! तेरे आगे पूरी जिंदगी पड़ी है। मेरी कितनी बची है। हमारी रिश्तेदारी में एक लड़का है।

उसने कहा कि मैं प्रीति का हाथ थामने को तैयार हूूं। वह भी मान गई। मैंने उसका कन्यादान किया। उसे बेटी मानकर सब कुछ किया। आज भी उसके मान-सम्मान के लिए तैयार हूं। कभी-कभी मिलने आती है। मेरा बेटा तो चला गया। दुख के सिवाय कुछ बचा नहीं। मैं नहीं चाहती थी कि प्रीति की जिंदगी दर्द में बीते। बेटा कहां भूला जाता है। कभी उसकी तस्वीर देखती हूं तो कभी कपड़े। बेटी की शादी हो गई। अकेली रहती हूं। 
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तस्वीर लिए बैठी गमगीन मां - फोटो : amar ujala
थक गई हूं, मदद चाहिए
जाते-जाते मां ने पुकारा। सुनाे बेटा! कोर्ट कचहरी के चक्कर काटते-काटते थक चुकी हूं। आर्थिक रूप से कमजोर हूं। थोड़ी-बहुत खेती है जो ठेके पर दे रखी है। उसी से गुजारा चलता है। मैं सरकार से मदद चाहती हूं ताकि बेटे के इंसाफ की लड़ाई लड़ सकूं।
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