घटना के बाद पहुंची महिलाएं
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‘गोली ही मार देते, तो दर्द कम होता’
विजयपाल की 67 वर्षीय बड़ी बहन ब्रह्मकली ने खबर सुनी तो दौड़ी चली आई। कमर मुड़ी हुई थी, सीढ़ियों पर चढ़ा भी नहीं जा रहा था। लोग उसे नीचे ही रोक रहे थे, लेकिन वह नहीं रुकी। भाई का खून पड़ा देखकर बोली कि हे भगवान कैसा बेटा था, जो बाप को ही मार डाला। गोली ही मार देते, इतनी बेरहमी से क्यों काट डाला। सोमवार सुबह साढ़े दस बजे बहनें ब्रह्मकली और कृष्णा पहुंची, लेकिन तब तक पुलिस शव को ले जा चुकी थी।
दोनों बहनों ने विजयपाल के भतीजे विकास से बात की और ऊपर जाने लगीं। बड़ी मुश्किल से सीढ़ियां चढ़ीं। चारपाई पर खून से लथपथ मच्छरदानी पड़ी थी। नीचे और दीवारों पर खून पड़ा था। रोते हुए बोलीं कि ऐसे बेटे को तो जेल से न निकलने दो, ऐसा जुल्म ना देखा हमने, कितनी बुरी तरह काट दिया, गोली मारते तो कम दर्द होता। अरे भैया मेरे पास आ जाता, मुझे भी नहीं बताया, तेरे साथ ऐसा हो रहा था। इसके बाद विकास ने दोनों बहनों को नीचे उतारा, जहां वे अन्य महिलाओं के साथ बैठ गईं।