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छोटे नाम बड़े काम: इन 5 खिलाड़ियों के संघर्ष की कहानियां सुन भर आईं आंखें, अब टोक्यो में दिखाएंगे दम, एडीजी बोले...

Thu, 22 Jul 2021 08:34 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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Tokyo Olympics 2020, टोक्यो ओलंपिक 2021 - फोटो : Amar Ujala Meerut
मेरठ में गुरुवार को अमर उजाला कार्यालय पहुंचे टोक्यो ओलंपिक जाने वाले खिलाड़ियों के परिजनों ने अपने संघर्ष की कहानियां बयां कीं। खिलाड़ियों को ओलंपिक तक पहुंचने में परिवार के लोगों ने कभी हार न मानते हुए समस्याओं का डटकर सामना किया। खिलाड़ियों को ओलंपिक तक पहुंचने में परिवार के लोगों ने कभी हार न मानते हुए समस्याओं का डटकर सामना किया। संसाधनों की कमी और आर्थिक समस्याओं से जूझते हुए अपने बच्चों पर विश्वास कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। इसी मेहनत का नतीजा है कि दुनिया के सबसे बड़े ओलंपिक गेम्स में मेरठ के पांच खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे। वहीं एक पैरा तीरंदाज विवेक चिकारा पैरालंपिक में पदक झटकने को बेताब हैं। खिलाड़ियों के परिजनों ने अमर उजाला के साथ अपने संघर्ष की यादें सांझा कीं। जिसे बताते हुए कई बार खिलाड़ियों के पिता की आंखें भर आईं। उनका विश्वास है कि खिलाड़ी ओलंपिक से पदक जीतकर लौटेंगे।

लक्ष्य साधने पर ही रहता है ध्यान
सरूरपुर क्षेत्र के कलीना गांव निवासी पिता जगमोहन सिंह ने कहा कि सौरभ शांत रहकर अभ्यास करने वाला लड़का है। जो भी करता है शिद्दत से करता है, पढ़ाई भी शौक से की और अब शूटिंग भी शौक से करता है। लक्ष्य साधने के लिए कोई समझौता उसने नहीं किया। बड़ौत में वीर शाहमल एकेडमी में प्रतिदिन जाना, कभी आलस या छुट्टी नहीं की। 10 मीटर एयर पिस्टल में सौरभ ने अंतरराष्ट्रीय स्तरीय स्पर्धाओं में 14 मैडल हासिल किए हैं। सोशल मीडिया से दूरी बनाकर सौरभ ने यह मुकाम हासिल किया है। सौरभ के पिता के साथ ताऊ ओमपाल सिंह व बड़े भाई नितिन चौधरी मौजूद रहे।
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Tokyo Olympics 2021, टोक्यो ओलंपिक 2021 - फोटो : Amar Ujala Meerut
बेटियों को बेटों से ऊपर समझो
20 किलोमीटर पैदलचाल में टोक्यो ओलंपिक खेलने जा रहीं माधवपुरम निवासी प्रियंका के पिता मदनपाल गोस्वामी ने कहा कि बेटियों को बेटों से ऊपर समझोगे तभी सफलता मिलेगी। बताया भाई के यहां बेटा हुआ तो सभी ने कहा आपके यहां भी बेटा हो जाता, लेकिन मैं और मेरी पत्नी अनिता ने प्रियंका को बेटों से भी ऊपर माना। आज उसने वो कर दिया जो बेटे भी नहीं कर पाते। ये बताते हुए मदनपाल गोस्वामी भावुक हो गए। पटियाला में रहते हुए आर्थिक समस्या के चलते एक समय का खाना गुरुद्वारे में खाया, लेकिन अपने खेल से कभी समझौता नहीं किया। 
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Tokyo Olympics 2021, टोक्यो ओलंपिक 2021 - फोटो : Amar Ujala Meerut
गुरुकुल प्रभात आश्रम से मिला सहयोग
सरधना के बहादरपुर गांव निवासी भाला फेंक खिलाड़ी अन्नू रानी के पिता अमरपाल सिंह ने बताया गुरुकुल प्रभात आश्रम टिकरी से उन्हें बहुत सहयोग मिला। अन्नू के घुटने में दिक्कत आई तो कोच ने खेलने को मना कर दिया। लेकिन स्वामी विवेकानन्द सरस्वती ने अन्नू का मार्गदर्शन किया तो फिर से खेलों में आई। स्वामी जी ने आर्थिक स्थिति को देखते हुए अन्नू का खेल प्रभावित न हो गाय भी दान की। जो आज भी घर पर बंधी है। बताया मैं अन्नू के खेल से खुश नहीं था, लेकिन उसकी मेहनत ने मुझे भी बदल दिया। उनके साथ आए अन्नू के दादा विक्रम सिंह ने कहा 15-16 किलोमीटर दूर खेलने आती थी। अन्नू ने बहुत परिश्रम किया। भाला नहीं था तो बांस से अभ्यास किया। उन्होंने अन्नू सहित सभी खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक जीतने की शुभकामना दी। 

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Tokyo Olympics 2021, टोक्यो ओलंपिक 2021 - फोटो : Amar Ujala Meerut
एक्सीडेंट में पैर गंवाया पर हौसला नहीं
पैरा तीरंदाज विवेक चिकारा का 2017 में एक्सीडेंट हो गया, जिसमें एक पैर गंवाना पड़ा। उनके पिता देवेंद्र सिंह ने बताया एक साल तक घर में गमगीन माहौल रहा। गुरुकुल प्रभात आश्रम पहुंचा तो कोच सत्यदेव प्रसाद ने प्रतिभा को पहचाना और तीरंदाज बनाया। खेलों में जाने के लिए नौकरी कुर्बान कर दी। आज टोक्यो पैरालंपिक में जगह बनाई है। कहा उसके संघर्ष की बात करता हूं तो आंखें भर आती हैं। उनके साथ चाचा प्रमोद सिंह मौजूद रहे।
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प्रियंका गोस्वामी के कोच गौरव को सम्मानित करते एडीजी राजीव सभरवाल - फोटो : Amar Ujala Meerut
प्रियंका जैसी लगनशील लड़की नहीं देखी
कोच गौरव त्यागी ने कहा 2010-11 में अभ्यास के दौरान उन्होंने प्रियंका की लगन देखी। दौड़ते समय अगर ध्यान इधर-उधर हो गया तो उसने अभ्यास नहीं छोड़ा। प्रियंका को जिम्नास्टिक से वो एथलेटिक में लेकर आए। जबकि उसकी क्षमता को देखते हुए 10 किलोमीटर दौड़ से 20 किलोमीटर पैदल चाल स्पर्धा में मौका दिया। जिसको प्रियंका ने साबित कर मेरठ का नाम रोशन किया। परिवार ने मुजफ्फरनगर के गांव का घेर बेचकर उसके सपनों को साकार किया। बच्चों को ओलंपिक पोडियम पर देखूंगा तो लगेगा मैं ही वहां खड़ा हूं।
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Tokyo Olympics 2021, टोक्यो ओलंपिक 2021 - फोटो : Amar Ujala Meerut
अंजान व्यक्ति को थमाया बच्ची का हाथ
एनएएस हॉकी मैदान के सीनियर हॉकी कोच प्रदीप चिन्योटी ने कहा कि 12-13 साल की उम्र में वो वंदना को उतराखंड से लेकर आए। उनके माता-पिता ने मुझ अंजान व्यक्ति को बच्ची का हाथ थमा दिया। इससे ज्यादा परिवार का बलिदान क्या हो सकता है। कहा आज वंदना मेरठ ही नहीं देश के हॉकी खिलाड़ियों के लिए आदर्श बन चुकी हैं। हमारी महिला टीम स्वर्ण पदक लेकर आएगी। 
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एडीजी राजीव सभरवाल। - फोटो : amar ujala
असम्भव कुछ भी नहीं, लगन और तपस्या होनी चाहिए
मुख्य अतिथि एडीजी राजीव सभरवाल ने खिलाड़ियों के संघर्षशील जीवन के किस्से सुनकर कहा कि जीवन में कुछ भी असम्भव नहीं है, सब कुछ सम्भव है। बस लगन और तपस्या होनी चाहिए। इस बार आश्वस्त हूं कि टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक देखने को मिलेंगे। पदक जीतकर लौटने पर इसी तरह स्वागत समारोह होगा, जैसे अमर उजाला ने आज कार्यक्रम किया है। अमर उजाला कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा इस तरह के कार्यक्रम होते रहने चाहिए। हम सभी को ओलंपिक में जाने वाले खिलाड़ियों और परिवारों का हौसला बढ़ाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी गदाधर बारीकी ने सभी खिलाड़ियों के परिवारों को बधाई और शुभकामना दी। कहा खेल विभाग को जो कार्यक्रम करना चाहिए वो अमर उजाला ने किया। सभी खिलाड़ियों ने संघर्ष करते हुए ये सफर तय किया है। आशा करता हूं मेरठ के खिलाड़ी दुनिया में हमारे देश का नाम रोशन करें। इस दौरान क्रीड़ा भारती जिला अध्यक्ष व जिला कुश्ती संघ संरक्षक अश्वनी कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे।
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