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एक ऐसा स्कूल: जहां पढ़ाई के लिए करना पड़ता है तीन दिन का इंतजार, अफसर नहीं लेते सुध, तस्वीरों में देखें हाल

Sat, 15 Oct 2022 04:48 PM IST
कपिल kapil पूजा राणा, सागर कश्यप, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
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मेरठ का सरकारी स्कूल। - फोटो : amar ujala
ये नजारा किसी प्राइवेट स्कूल का नहीं है। ये मेरठ का परिषदीय स्कूल है। लिसाड़ीगेट में सात कमरों के प्रह्लाद नगर उच्च प्राथमिक विद्यालय में 1119 छात्राएं पढ़ती हैं। यहां क्लास के लिए इनमें से 550 छात्राओं को सप्ताह के पहले तीन दिन बुलाया जाता है तो शेष को बाद के तीन दिन। यहां तीन शिक्षामित्र, तीन अनुदेशक, छह सहायक अध्यापक और एक प्रधानाध्यापक तैनात हैं।

लिसाड़ीगेट अल्पसंख्यक बहुल आबादी वाला इलाका है। यह अपराध के लिए भी बदनाम है। अभिभावक बेटियों को पढ़ने के लिए घर से दूर भेजना नहीं चाहते। प्रह्लाद नगर उच्च प्राथमिक विद्यालय लिसाड़ी गेट थाने के पास है। अभिभावकों को लगता है कि यहां बच्चियां महफूज रहेंगी। इसलिए विद्यालय में छात्राओं की संख्या 1119 हैं।
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छात्राएं। - फोटो : amar ujala
देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म दिवस छात्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2010 में 15 अक्टूबर को विश्व छात्र दिवस के रूप में घोषित किया था।
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सरकारी स्कूल। - फोटो : amar ujala
कलाम हर बच्चे को शिक्षा के अधिकार के हिमायती थे, लेकिन लिसाड़ीगेट के स्कूल में पढ़ाई के लिए 500 से ज्यादा बच्चियों को तीन दिन इंतजार करना पड़ता है। शिक्षा विभाग के अफसरों ने कभी यहां आकर झांकने की कोशिश नहीं की। ये तक जानने की कोशिश नहीं हुई कि सभी बच्चियों को प्रतिदिन कक्षा में पढ़ने का मौका कैसे मिले। 

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छात्राएं। - फोटो : amar ujala
प्रधानाध्यापक नौशाद अली ने बताया कि स्कूल में सिर्फ सात कक्ष हैं। गर्मियों में उपस्थिति लगभग पूरी होती है, ऐसे में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 
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सरकारी स्कूल। - फोटो : amar ujala
1072 परिषदीय स्कूल हैं जिले में
637 प्राथमिक स्कूल हैं।
171 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। 
264 कंपोजिट विद्यालय हैं। 
1,42,601 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं इन सभी स्कूलों में। 
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छात्रा। - फोटो : amar ujala
और जगह होती तो अच्छा होता
हमारे साथ शिक्षक भी मेहनत करते हैं और हम मन लगाकर पढ़ते हैं। अगर स्कूल में और जगह होती तो बहुत अच्छा होता। - सानिया, छात्रा 
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छात्रा। - फोटो : amar ujala
फर्नीचर की कमी 
गर्मियों में बहुत ही ज्यादा परेशानी होती है और स्कूल में टेबल की भी कमी है। - शाहिजा, छात्रा
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