सहारनपुर जनपद में नकुड़ और मिरगपुर के बाद सरसावा में शरारती तत्वों ने गोशाला के गेट के पास मांस से भरा बोरा फेंक दिया। इसके पास ही डिजिटल लाइब्रेरी की छत पर भी पशु अवशेष मिले हैं। इससे गुस्साए लोग नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में थाने पर पहुंचे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। इससे पहले रविवार को नकुड़ में दो धार्मिक स्थलों और व्यसन मुक्त गांव मिरगपुर में भी इसी तरह की घटना कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई थी। पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लिया है।
मिरगपुर के ग्रामीणों ने सोमवार को गांव में विशेष वर्ग के लोगों के आने पर रोक लगा दी है और पुलिस प्रशासन को घटना के खुलासे के लिए दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। बुधवार को सर्वसमाज की महापंचायत बुलाई है। दो दिन एक ही तरह से पांच घटनाएं होने के पीछे गहरी साजिश होने की आशंका जताई जा रही है। रविवार को नकुड़ और मिरगपुर में गण्यमान्य लोगों और पुलिस ने समझदारी दिखाई व आक्रोशित लोगों को शांत कर माहौल बिगड़ने से बचाया। इनकी सूझबूझ के कारण शरारती तत्वों की साजिश नाकाम हो गई तो सोमवार को सरसावा में कोशिश की गई। बाबा फकीरादास की शिक्षाओं के कारण देवबंद से सटा गांव मिरगपुर सैकड़ों वर्षों से व्यसन मुक्त है। यहां मांस, मदिरा, बीड़ी-सिगरेट, तंबाकू सहित 17 तामसिक वस्तुओं को सेवन पर प्रतिबंध है। यह गांव इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में व्यसन मुक्त गांव के रूप में दर्ज है। एसडीएम देवबंद दीपक कुमार ने बताया कि जो भी दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। इससे पहले रविवार दोपहर करीब बजे नकुड़ कस्बे में दो धार्मिक स्थलों के पास मांस फेंकने की घटना हुई थी और हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने हंगामा भी किया।