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उफान पर नदियां: हथिनीकुंड बैराज से यमुना में छोड़ा गया 93 हजार 299 क्यूसेक पानी, गंगा का जलस्तर भी बढ़ा

Thu, 29 Jul 2021 12:10 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर/ शामली
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यमुना का जलस्तर - फोटो : Amar Ujala bijnor
पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश होने से क्षेत्रीय नदियों का जलस्तर बढ़ गया। हथिनी कुंड बैराज से यमुना में गुरुवार को 93 हजार 299 क्यूसेक पानी फिर छोड़ा गया है। यह पानी आज सुबह 8:00 बजे छोड़ा गया है। वहीं बिजनौर में पिछले 24 घंटे में हथिनीकुंड बैराज से यमुना में छोड़े गए पानी के बाद शामली के कैराना में यमुना का जलस्तर 55 सेंटीमीटर बढ़ गया है।  

लगातार यमुना में छोड़े जा रहे पानी से शामली में आज शाम तक यमुना खतरे के निशान के पास पहुंच जाएगी। खतरे के निशान के बाद जिले में यमुना कटान करते हुए आसपास खेतों में बढ़ना शुरू हो जाएगी।
जिले में दोपहर 3:00 बजे कैराना यमुना ब्रिज पर यमुना का जलस्तर 230 पॉइंट 4 मीटर दर्ज किया गया। देर शाम तक और जल स्तर बढ़ने की संभावना है। शामली के हरियाणा बॉर्डर के पास बड़ौली में यमुना का जलस्तर हरियाणा के करनाल जिले की ओर बढ़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से पानी ने खेतों की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। 
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यमुना का जलस्तर - फोटो : Amar Ujala bijnor
बिजनौर में भागूवाला क्षेत्र की कोटावाली नदी बुधवार सुबह से ही उफान पर रही। कोटावाली नदी रपटे पर तीन फीट से अधिक पानी चला। पानी के तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने रपटे से वाहनों के गुजरने पर रोक लगा दी। एसडीएम परमानंद झा ने भागूवाला चौकी पुलिस को नदी में पानी के तेज बहाव के दौरान किसी भी वाहन को रपटे से गुजरने की अनुमति नहीं देने को कहा।

पुलिस ने शाम चार बजे तक किसी भी वाहन को नदी रपटे से नहीं गुजरने दिया। घंटों इंतजार कर रहे वाहनों ने फिर भागूवाला-चंदक हेड मार्ग से आवागमन किया। उधर, मंडावली क्षेत्र की सूखा नदी और लकड़ाहन नदी भी उफान पर रही। ग्राम जटपुरा बोंडा के पास लकड़ाहन नदी के रपटे पर पानी आने से करीब तीन घंटे तक यातायात ठप रहा। वहीं, मोटा महादेव-भागूवाला बाईपास मार्ग पर सूखा नदी और लकड़ाहन नदी के रपटे पर पानी के तेज बहाव से कई घंटों तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। 
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यमुना का जलस्तर - फोटो : Amar Ujala Meerut
गांव में कैद हो जाते हैं पीतमगढ़ के लोग
भागूवाला क्षेत्र के गांव पीतमगढ़ के लोग अपने ही गांव में कैद है। ग्रामीण अशोक कुमार, मुन्ने, पूरन, भोपाल, धर्मपाल का कहना है कि पीतमगढ़ गांव कोटावाली नदी और कोठियारी नदी के बीच बसा है।

गांव से आवाजाही का रास्ता दोनों नदियों से होकर गुजरता है। लेकिन बरसात में दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण अपने गांव में ही कैद होने को मजबूर हो जाते हैं। बुधवार को भी दोनों नदियों को जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की आवाजाही बंद हो गई।

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गंगा का जलस्तर बढ़ने से किसान चिंतित - फोटो : Amar Ujala Meerut
गंगा का जलस्तर एक लाख क्यूसेक के पार, तटबंध टूटने का खतरा बढ़ा
पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश से बुधवार को गंगा का जलस्तर एक लाख क्यूसेक के ऊपर पहुंच गया। हस्तिनापुर खादर क्षेत्र में गंगा का तटबंध टूटने का खतरा बढ़ गया है। वहीं क्षतिग्रस्त तटबंध को जोड़ने के लिए स्थानीय ग्रामीण शाम तक जुटे रहे।
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यमुना का जलस्तर - फोटो : Amar Ujala bijnor
बिजनौर बैराज पर तैनात अवर अभियंता पीयूष कुमार ने बताया कि बुधवार शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर एक लाख 28 हजार क्यूसेक पर चल रहा था। ऐसे में खादर क्षेत्र के लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई स्थानों से गंगा के कटान के कारण कच्चा तटबंध क्षतिग्रस्त हो गया है। इसकी मरम्मत में ग्रामीण, नरेगा श्रमिक और कारसेवक लगे हैं। हालांकि के कारण हाल ही में डाली गई मिट्टी तटबंध से बहकर नीचे की ओर जा रही है।

बीते दो दिनों से हो रही बारिश के कारण निचले इलाकों के जंगल जलमग्न हो गए हैं। कई गांव के मुख्य मार्गों पर भी बारिश का पानी भर गया है। खादर क्षेत्र के आसपास के गांव के ग्रामीण लगातार तटबंध की निगरानी कर रहे हैं।
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गंगा का जलस्तर बढ़ने तटबंध बनाते किसान - फोटो : Amar ujala
गंगा किनारे बसे ग्रामीणों की बढ़ी चिंता
गंगा किनारे बसे गांव फतेहपुर प्रेम, शेरपुर, नई बस्ती, हंसापुर, परसापुर, सिरजोपुर, हादीपुर गांवडी, मखदुमपुर, जलालपुर, जोरा आदि गांव के ग्रामीणों की जलस्तर बढ़ने से चिंता बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी गंगा का जलस्तर बढ़ सकता है। इसके बाद भी शासन प्रशासन की बाढ़ से निपटने की तैयारी नजर नहीं आ रही है।
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