मेरठ में तिरंगे को सीने से लगाकर भीड़ के बीच एक कोने में खड़ी स्वाति की आंखों का पानी सूख चुका था। वह कभी रोती तो कभी गुमसुम सी खड़ी अपने पति मयंक को निहार रही थी। सैन्य अधिकारियों ने उसे समझाकर वहां से हटाया, तो स्वाति ने मयंक को सैल्यूट किया और आई लव यू कहकर वहां से हट गई। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने भी मयंक को सैल्यूट किया।
सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पर जैसे ही सैन्य अधिकारियों ने स्वाति को तिरंगा सौंपा, तो उसने उसे सीने से लगा लिया और पति के चरणों से लिपटकर रोने लगी। परिवार के लोगों की आंखों से भी झर-झर आंसू बह रहे थे। इसके बाद सैनिकों ने पार्थिव शरीर को चिता पर रख दिया। स्वाति वहीं पर एक कोने में खड़ी हो गई और पति को निहारती रही। पिता विरेंद्र सिंह ने जैसे ही मुखाग्नि दी, तो स्वाति फिर रोने लगी। परिवार की अन्य महिलाओं और सैन्य अधिकारियों ने उसे वहां से हटाया। इससे पहले स्वाति ने पति को सैल्यूट किया और आई लव यू कहा।