फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंतिम विदाई: चिता में पति को निहारती रही पत्नी, टूट गए सपने... अधूरी रह गई जिंदगी, सैल्यूट कर कहा- ‘आई लव यू’

Mon, 13 Sep 2021 12:32 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
1 of 9
शहीद का अंतिम संस्कार किया गया। - फोटो : amar ujala
मेरठ में तिरंगे को सीने से लगाकर भीड़ के बीच एक कोने में खड़ी स्वाति की आंखों का पानी सूख चुका था। वह कभी रोती तो कभी गुमसुम सी खड़ी अपने पति मयंक को निहार रही थी। सैन्य अधिकारियों ने उसे समझाकर वहां से हटाया, तो स्वाति ने मयंक को सैल्यूट किया और आई लव यू कहकर वहां से हट गई। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने भी मयंक को सैल्यूट किया। 

सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पर जैसे ही सैन्य अधिकारियों ने स्वाति को तिरंगा सौंपा, तो उसने उसे सीने से लगा लिया और पति के चरणों से लिपटकर रोने लगी। परिवार के लोगों की आंखों से भी झर-झर आंसू बह रहे थे। इसके बाद सैनिकों ने पार्थिव शरीर को चिता पर रख दिया। स्वाति वहीं पर एक कोने में खड़ी हो गई और पति को निहारती रही। पिता विरेंद्र सिंह ने जैसे ही मुखाग्नि दी, तो स्वाति फिर रोने लगी। परिवार की अन्य महिलाओं और सैन्य अधिकारियों ने उसे वहां से हटाया। इससे पहले स्वाति ने पति को सैल्यूट किया और आई लव यू कहा।
विज्ञापन

2 of 9
शहीद मेजर की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब। - फोटो : amar ujala
सैन्य सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई 
शहीद मेजर मयंक विश्नोई को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। थ्री जाट रेजीमेंट के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। आरआर बटालियन की राजपूत रेजीमेंट सहित सभी सैन्य अफसरों ने पुष्प चक्र अर्पित किए।
विज्ञापन

3 of 9
शहीद मेजर के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़। - फोटो : amar ujala
स्वाति की बहन हो गई बेहोश 
सूरजकुंड श्मशान घाट पर अपने जीजा शहीद मेजर के अंतिम दर्शन करके और स्वाति के आंसुओं को देखकर बहन बेहोश होकर गिर पड़ी। परिवार के लोगों ने पानी पिलाकर होश दिलाया।

4 of 9
विलाप करते परिजन। - फोटो : amar ujala
तीन दोस्तों की जोड़ी को लग गई नजर
मेजर मयंक का एक दोस्त एयरफोर्स में तो दूसरा बैंक में कार्यरत है। तीनों दोस्तों की जोड़ी पूरे क्षेत्र में मशहूर थी। मार्शल पिच और डिफेंस में हुए कई क्रिकेट टूर्नामेंट में तीनों ने जीत दिलाई। तीनों दोस्तों में पढ़ाई और स्पोर्ट्स में मेजर मयंक सबसे अच्छे थे। समय मिलने पर दोस्तों के नोट्स बनाने और पढ़ाई में भी मदद करते थे।
विज्ञापन

5 of 9
विलाप करते परिजन। - फोटो : amar ujala
मेजर मयंक ने 12वीं तक की शिक्षा केवी पंजाब लाइंस से प्राप्त की। स्कूल में उनका सिर्फ एक मित्र नंगलाताशी निवासी अमन रहा। अमन आजकल एयरफोर्स में टेक्निकल विभाग में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त एक और मित्र दिशांत शर्मा रहा, जो शिवलोकपुरी में मयंक के पड़ोस में रहता है। दिशांत ने कृष्णा पब्लिक स्कूल से 12वीं कक्षा उत्तीर्ण की और आजकल पीएनबी में कार्यरत हैं।
विज्ञापन

6 of 9
गमगीन माहौल में हुआ अंतिम संस्कार। - फोटो : amar ujala
बताया गया कि तीनों मित्र गोविंदपुरी में चीनू भाई के यहां गणित का ट्यूशन पढ़ने साथ जाते थे। दिशांत ने बताया कि दसवीं और बारहवीं कक्षा में मयंक ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए। पूरे मोहल्ले के बच्चों को मयंक का ही उदाहरण दिया जाता था।
विज्ञापन

7 of 9
विलाप करते परिजन। - फोटो : amar ujala
पांचवें प्रयास में हुआ एनडीए में सेलेक्शन
मयंक एनडीए की परीक्षा तो पास कर लेते थे, लेकिन इंटरव्यू में रह जाते थे। मित्र दिशांत ने बताया कि पांचवें प्रयास में मयंक को सफलता प्राप्त हुई। पिता रिटायर्ड सूबेदार वीरेंद्र सिंह विश्नोई को मयंक अपना प्रेरणास्त्रोत मानते थे। पिता एमए इकनॉमिक्स में 1978 में गोल्ड मेडलिस्ट रहे। बचपन से ही मयंक की सेना में जाने की इच्छा थी। मयंक के जज्बे को देखकर उसका मित्र अमन भी उन्हीं की राह पर चल पड़ा। तीनों दोस्त रनिंग, लांग जंप, हाई जंप आदि की छावनी क्षेत्र में प्रेक्टिस किया करते थे। 

8 of 9
विलाप करते परिजन। - फोटो : amar ujala
देश सेवा के अटूट जज्बे से परिपूर्ण थे मयंक
सेना में बॉर्डर पर तैनात रहने के लिए कुछ अनिवार्य नियम होते हैं। हिल एरिया में कार्य करने के लिए समय सीमा निर्धारित होती है। दिशांत ने बताया कि मेजर मयंक बॉर्डर की ही पोस्टिंग मांगते थे। डेढ़ वर्ष बॉर्डर पर रहने के बाद उच्च अधिकारियों ने उनसे कहा था कि छह माह का हिल एरिया में आपका समय शेष है। यह समय बाद में पूरा कर लेना, लेकिन मयंक ने कहा कि वह बॉर्डर पर ही रहना चाहते हैं। अति आवश्यक परिस्थितियों में ही मयंक छुट्टी लिया करते थे।
विज्ञापन

9 of 9
शहीद मेजर मयंक विश्नोई - फोटो : अमर उजाला
साइकिल से जाते थे कोचिंग
एनडीए का एग्जाम पास करने के लिए मयंक ने डिफेंस कॉलोनी गंगानगर में कर्नल देवगन से ट्रेनिंग ली। दिशांत ने बताया कि वह साइकिल से ही कोचिंग जाते थे। जो भी पढ़ाया जाता था, उसकी प्रेक्टिस करते थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें