मेजर मयंक विश्नोई बचपन से ही सेना में जाने के सपने संजोते थे। वह अपने पिता से सेना के बारे में पूछते रहते थे। वह अक्सर परिवार वालों से यही कहते थे कि सिर दर्द की गोली खाने से अच्छा है देश के लिए गोली खाओ। वह जब भी छुट्टी आते थे, अपनी बहनों से कहते थे कि देखना एक दिन तिरंगे में लिपटकर घर आऊंगा।
अब छोटे भाई की ये बातें याद कर बहन तनु और अनु फफक पड़ती हैं। वह कह रही हैं कि जो बात कहता था आज वह सच हो गई। बहन तनु ने बताया कि मयंक हमेशा से ही दुश्मनों को चित करने के लिए सबसे आगे रहता था। घर पर जब भी आता था तो कहता था कि ऑपरेशन के दौरान हमेशा आगे रहता हूं। बहन तनु के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह छोटे भाई के बलिदान पर गर्व महसूस कर रही हैं, लेकिन इकलौते भाई के जाने का दुख उन्हें सता रहा है।