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दुनिया में छाईं भारत की बेटियां: तीनों की ऐसी उपलब्धियां जिन्हें आप भी करेंगे सलाम, पढ़ें संघर्ष की कहानियां

Sat, 06 Aug 2022 07:20 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ

सार

Commonwealth games 2022: बॉलीवुड अभिनेता अमीर खान की दंगल फिल्म का यह डायलॉग 'म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के' पश्चिमी यूपी की इन तीन बेटियों पर सटीक बैठता है। 
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दिव्या काकरान, प्रियंका गोस्वामी और रूपल चौधरी। - फोटो : amar ujala
Commonwealth games 2022: बॉलीवुड अभिनेता अमीर खान की दंगल फिल्म का यह डायलॉग 'म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के' पश्चिमी यूपी की इन तीन बेटियों पर सटीक बैठता है। तीनों ही उम्र में छोटी हैं लेकिन उपलब्धि ऐसी हासिल की कि पूरी दुनिया में हर कोई सलाम कर रहा है। जी हां हम बात रहे हैं कि अर्जुन अवार्डी पहलवान दिव्या काकरान (23), अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय दौरे पर दो पदक जीतने वाली रूपल चौधरी (17) और देश की झोली में सिल्वर मेडल डालने वाली प्रियंका गोस्वामी (26) की। इन तीन महिला खिलाड़ियों ने अभी तक चार मेडल जीतकर हर भारतीय का दिल जीत लिया है। आइए अब इनकी संघर्ष की कहानियां और उपलब्धियां बताते हैं।

मुजफ्फरनगर जनपद में मंसूरपुर के गांव पुरबालियान की रहने वाली दिव्या काकरान ने अपने बाबा राजेंद्र पहलवान से मिली कुश्ती की विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है। बाबा के बाद पिता सूरज पहलवान ने अखाडे़ में कुश्ती लड़ी। लोगों के विरोध के बावजूद सूरज ने बेटी दिव्या को अखाड़े में उतार कर कुश्ती के दांवपेंच सिखाए। दिव्या ने लड़कों से भी कुश्ती लड़ी। अपनी लगन, मेहनत और परिश्रम से वह आज इस मुकाम पर पहुंचीं।
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पहलवान दिव्या काकरान - फोटो : अमर उजाला
बता दें कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई प्रतियोगिताओं में दिव्या अब तक 73 पदक जीत चुकी हैं। इनमें 53 गोल्ड, सात रजत और 13 कांस्य पदक शामिल हैं। दिव्या ने चीन में सीनियर एशियन चैंपियनशिप में देश के लिए कांस्य पदक, मंगोलिया में यू-23 सीनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल, ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित 21वें राष्ट्र मंडल खेलों में कांस्य पदक, इंडोनेशिया के जकार्ता में हुए 18वें एशियन गेम्स में भी कांस्य पदक जीता था।
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पहलवान दिव्या काकरान - फोटो : अमर उजाला
वह एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक विजेता बनी थीं। वहीं कामनवेल्थ में भी गोल्ड पदक जीता था। अब बर्मिंघम में नाइजीरिया की पहलवान से मिले शुरुआती झटके के बाद दिव्या काकरान ने अखाड़े में खुद को साबित कर दिखाया। देर रात खेले गए मुकाबले में दिव्या ने शानदार खेल दिखाते हुए पदक जीत लिया।

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रूपल चौधरी। - फोटो : amar ujala
जुनून ने जैनपुर की बेटी को बनाया चैंपियन
दौड़ने की जिद और जुनून के दम पर गांव जैनपुर की बेटी रूपल चौधरी चैंपियन बन गई। शुरुआत में परिवार नहीं चाहता था कि बेटी खेलों में जाए। जिद में रूपल ने तीन दिन खाना नहीं खाया तो मां ने पिता को मनाया। वर्ष 2017 में पहली बार पिता ओमवीर सिंह रूपल को कैलाश प्रकाश स्टेडियम में कोच दंपती विशाल और अमिता सक्सेना के पास ले गए। इसके बाद रूपल आगे बढ़ती चली गईं। 
 
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रूपल चौधरी। - फोटो : amar ujala
पिता ने मोटरसाइकिल से प्रतिदिन करीब 30 किलोमीटर का सफर तय कर रूपल को गांव से मेरठ स्टेडियम तक पहुंचाया। वहां कोच दंपती ने रूपल की आंखों में पल रहे सपनों को हकीकत का रास्ता दिखाया। पांच वर्ष की मेहनत के बाद रूपल ने पहले ही अंतरराष्ट्रीय दौरे में दो मेडल जीत खुद को साबित कर दिखाया है। कोलंबिया में आयोजित अंडर-20 जूनियर विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक झटका है। वहीं 4×400 मीटर स्पर्धा में भी रजत पदक जीता है। उनके सामने 4×400 मीटर बालिका वर्ग स्पर्धा में एक और पदक पाने का मौका है। 
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अन्य खिलाड़ियों के साथ रूपल चौधरी। - फोटो : amar ujala
रूपल के राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तरीय पदक 
दिल्ली में 400 मीटर राष्ट्रीय एथलेटिक चैम्पियनशिप 2021 दिल्ली में स्वर्ण पदक, प्रदर्शन: 53.73 सेकंड। 
असम में जूनियर नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप 2021 400 मीटर में कांस्य पदक, प्रदर्शन: 56.76 सेकंड।
संगरूर में तीसरा स्कूल नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप 2019 में 400 मीटर में स्वर्ण पदक:प्रदर्शन 55.78 सेकंड।
विजयवाड़ा में आयोजित जूनियर नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप 2019 में 400 मीटर में स्वर्ण पदक: प्रदर्शन: 55.37 सेकंड।
रांची में आयोजित जूनियर नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप 2018 पदक रजत, प्रदर्शन 1.37 सेकंड।
चंडीगढ़ में आयोजित सीनियर फेडरेशन कप में रजत पदक। 
गुजरात में राष्ट्रीय एथकेटिक्स में स्वर्ण पदक , प्रदर्शन 52:48 सेकंड।
कोलंबिया में अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 4×400 मीटर में रजत पदक। प्रदर्शन: 3:17:76 मिनट।
कोलंबिया में अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक, प्रदर्शन 51:85 सेकंड।
उत्तर प्रदेश के एक किसान की बेटी रूपल चौधरी विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। रूपल ने कोलंबिया के कैली में महिलाओं की 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक जीता। इससे पहले उन्होंने 4 गुणा 400 मीटर रिले में रजत पदक हासिल किया था।
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एथलीट प्रियंका गोस्वामी - फोटो : अमर उजाला
प्रियंका ने देश की झोली में डाला सिल्वर मेडल
मेरठ के माधवपुरम निवासी एथलीट प्रियंका गोस्वामी मूल रूप से मुजफ्फरनगर की रहने वाली हैं। आज उन पर पूरा शहर गर्व कर रहा है। वह देश के लिए पदक जीतने वाली खिलाड़ी बनी हैं। कैलाश प्रकाश स्टेडियम में उन्होंने अभ्यास कर अपना सपना पूरा किया है।

बता दें कि प्रियंका गोस्वामी रेलवे में कार्यरत हैं। वह अभी तक 20 किमी. पैदल चाल में तीन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कर चुकी हैं, जबकि 16 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 14 पदक अपने नाम कर चुकी हैं। प्रियंका को आदर्श मानकर फूलबाग निवासी आशु, पांडवनगर निवासी रवि व अन्नू, रोहटा रोड निवासी ललिता पैदल चाल में अभ्यास कर रहीं हैं।
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