जांच करती पुलिस
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सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2008 तक आसिफ का भाई दिलशाद व सोनू सक्का दोनों पक्के दोस्त थे, जो एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते थे। कई आपराधिक प्रवृत्ति के कामों में दोनों की हिस्सेदारी थी। सूत्रों के अनुसार, इसके कुछ समय बाद सोनू सक्का के भाई की हत्या हुई, जिसमें दिलशाद गवाह था।
इस मामले में सोनू सक्का पक्ष की ओर से बिना दिलशाद को विश्वास में लिए हत्यारोपी पक्ष से समझौता कर लिया गया। इसके बाद से दिलशाद व सोनू पक्ष की दोस्ती में दरार आ गई और दोनों अलग-अलग काम करने लगे।