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शहीद को देश का सलाम, घरों से बरस रहे थे फूल और आंखों में थे आंसू, देखें ये तस्वीरें

Sat, 15 Jun 2019 06:09 PM IST
कपिल kapil रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, शामली
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शहीद को कंधा देते मंत्री और पुलिस अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
अनंतनाग में आतंकी हमले में शहीद सतेंद्र को श्रद्धांजलि देने को गांव के गांव उमड़ पड़े। शहीद की अंतिम यात्रा पर महिलाओं ने घरों से फूल बरसाकर नम आंखों से विदाई दी।
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शहीद की अंतिम यात्रा - फोटो : अमर उजाला
सुबह चार बजे से ही आसपास के गांवों के सैकड़ों युवा हाथ में तिरंगे लेकर मेरठ-करनाल हाईवे पर लिसाढ़ मोड़ पर शव के इंतजार में खडे़ थे। करीब पौने आठ बजे जैसे ही सीआरपीएफ की गाड़ी में शव पहुंचा, तो पूरा माहौल सतेंद्र भाई अमर रहे, भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों से गूंज गया। जिधर से भी यात्रा गुजरी लोग घरों से शहीद के अंतिम दर्शन को दौड़ गए। घरों से फूल बरस रहे थे और चौखट पर खड़ी महिलाओं की आंखों में आंसू थे।
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शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला
सतेंद्र भले ही किवाना गांव का रहने वाला था, लेकिन उसे श्रद्धांजलि देने को आसपास के लिसाढ़, मतनावली आदि कई गांव के युवा सुबह ही पानीपत करनाल हाईवे पर लिसाढ़ मोड़ पर पहुंच गए थे। हाथों में तिरंगा था और मन में देशभक्ति का जोश। जैसे- जैसे वक्त बीतता गया युवाओं की संख्या बढ़ती गई। पौने आठ बजे जब सीआरपीएफ की गाड़ी में शव पहुंचा तो दूर से ही वाहन देखकर युवाओं ने सतेंद्र भाई अमर रहे के नारे लगाने लगे। करीब चार किमी दूरी तय कर शव लिसाढ़ गांव होते हुए किवाना पहुंचा। रास्ते में जिधर से भी काफिला गुजरा घरों से लोगों ने पुष्प बरसाकर सतेंद्र को श्रद्धांजलि दी।

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शहीद की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला
अंतिम दर्शन को बेताब रहे लोग
शहीद सतेंद्र कश्यप का पार्थिव शरीर सुबह 8.10 बजे पैतृक गांव किवाना में पहुंचा, तो हर कोई गांव के लाडले की झलक पाने को दौड़ पड़ा। भीड़ उनके अंतिम दर्शन को बेताब थी। हर कोई सतेंद्र की झलक पाना चाहता था। लोग आसपास के मकानों की छत और दीवारों से कूदकर अंदर आने का प्रयास करने लगे। अफसरों ने समझाया कि अंतिम दर्शन का मौका सबको मिलेगा।
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विलाप करते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
बुजुर्ग महिलाएं फूट फूटकर रोईं
अंतिम यात्रा गांव से शुरू हुई तो लोगों ने घरों से पुष्प वर्षा की। एक मकान के चबूतरे पर खड़ी दो बुजुर्ग महिलाएं तो सतेंद्र का शव देखकर बिलख- बिलख कर रो पड़ीं। लोगों ने उन्हें दिलासा दी।
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गांव पहुंचा शहीद का शव - फोटो : अमर उजाला
युवा बोले, सेना को खुली छूट दो फिर देखो परिणाम
युवाओं में पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा था। उन्होंने पाकिस्तान मुर्दाबाद के खूब नारे लगाए। उनमें आतंकवादियों का सफाया करने का जोश और जज्बा भी खूब था। हर तरफ जवान सतेंद्र की बहादुरी और मिलनसार व्यवहार और मातृभूमि की रक्षा के लिए बलिदान देने की चर्चा होती रही। जब तक सूरज चांद रहेगा, सतेंद्र का नाम रहेगा के नारे दूर तक सुनाई दे रहे थे।
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शव से लिपटकर रोता भाई - फोटो : अमर उजाला
गांव के मोनू, मोहित और सुमित ने कहा कि शहीद सतेंद्र ने देश के लिए प्राण न्यौछावर कर पूरे गांव को गौरवान्वित किया है। उनकी शहादत को कभी नहीं भुलाया जाएगा। ग्रामीण मांगेराम ने तो यहां तक कहा कि सरकार एक बार सेेना को खुली छूट दे और युवाओं को मौका देकर तो देखे, आतंकवाद तो क्या पाकिस्तान भी नहीं बचेगा। एक सतेंद्र ही नहीं सैकड़ों हजारों जवान अपने देश की रक्षा के लिए सबकुछ बलिदान करने को तैयार है।

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