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बरसाना में लठामार होली: 15 लाख श्रद्धालु बने साक्षी, गूंजे राधा रानी के जयकारे; तस्वीरों में देखें अलौकिक छटा

Mon, 18 Mar 2024 10:09 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला, मथुरा
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बरसाना में लठामार होली का जश्न - फोटो : संवाद
तीर्थनगरी मथुरा में राधारानी की नगरी बरसाना में सोमवार को विश्व प्रसिद्ध लठामार होली खेली गई। इसमें करीब 15 लाख श्रद्धालु पहुंचे। बरसाना में दोपहर के समय सोमवार को भाव और भक्ति के अनूठे रंगों में सराबोर एक ओर नंदगांव के हुरियारे ढाल लेकर बरसाना पहुंचे तो दूसरी ओर बरसाना की हुरियारिनें लाठियां लेकर रंगीली गली में तैयार थीं। होली के गीतों की गूंज बीच शुरुआत हुई लठामार होली की। 

इस समय रंगीली गली में हर हुरियारा कृष्ण और उनके सखा ग्वालबालों का रूप तो हर हुरियारिन राधारानी और उनकी सखियों का रूप लिए थी। ढाल पर लठों की चोट पड़ते ही लाड़ले-लाड़ली की जय-जयकार गूंज उठती। आनंद इतना था कि देश और विदेश से करीब 15 लाख श्रद्धालु इस लीला के साक्षी बनने बरसाना पहुंचे। 
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बरसाना में लठामार होली खेलते हुरियारे और हुरियारिनें - फोटो : संवाद
दरअसल, सुबह से ही बरसाना के हर घर में उत्सव शुरू हो गया। गली-गली में बस यही चर्चा रही कि नंदगांव से हुरियारों की टोली कब आने वाली है। बरसाना की हुरियारिन अपने प्रेम पगे लठों के साथ होली खेलने को तैयार थीं। श्रीजी मंदिर में भी सुबह से ही गुलाल के बदरा दिखाई देने लगे। दोपहर को जैसे ही नंदगांव के हुरियारों की टोली बरसाना पहुंची तो उल्लास छा गया। 
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विदेशी श्रद्धालु भी बने बरसाना में लठामार होली के साक्षी - फोटो : संवाद
साढ़े तीन बजे से ही रंगीली गली में भीड़ का छोर नहीं दिखा। चार बजे लठामार होली की शुरुआत हुई और हर ओर आनंद का रंग बरसने लगा। अब हुरियारिनें हुरियारों पर लठ बरसातीं तो हुरियारे यह कहकर उन्हें चिढ़ाते कि ‘और तेज’। ज्यूं ही हंसी-ठिठोली बढ़ती तो हुरियारिनों के लठों का वेग और बढ़ जाता। 
 

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बरसाना में हुरियारों पर प्रेम पगे लट्ठ बरसातीं हुरियारिनें - फोटो : संवाद
ऐसे में उम्र के बंधन भी पीछे छूट गए। कोई हुरियारिन बाल रूप हुरियारे पर लठ बरसा रही थी तो हुरियारे भी अपने से उम्र में छोटी हुरियारिनों से हंसी ठिठोली में पीछे नहीं रहे। पांच बजे करीब अलौकिक प्रेम के भाव और भक्ति का आनंद अपने चरम पर पहुंच कर पूर्ण हुआ। 
 
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बरसाना में लठामार होली के खास पलों को कैमरे में कैद करतीं युवतियां - फोटो : संवाद
इस लीला को देखने देश के तो अलग-अलग शहरों के अलावा विदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए। लठामार होली शुरू होने के बाद तो जो जहां था वहीं रह गया। पुलिस-प्रशासन की सभी व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं की भीड़ को काबू करने में फेल हो गईं। इधर, लौटते वक्त भी तमाम लोग बरसाना के रास्ते में रात तक फंसे रहे।
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