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दुष्कर्म पीड़िता से थाने में रेप: बड़ा सवाल- बिना मुकदमा लिखे आखिर बयान के लिए क्यों बुलाई गई पीड़िता, जानिए क्या है नियम

Thu, 05 May 2022 10:26 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर
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गिरफ्तार एसओ - फोटो : अमर उजाला
झांसी के ललितपुर के पाली थाने में दुष्कर्म की घटना के बाद से एक सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर 13 साल की दुष्कर्म पीड़िता को थाने पर बुलाया ही क्यों गया। वैसे भी पहले मुकदमा दर्ज किया जाता है और उसके बाद बयान होते हैं। किशोरी के बयान या तो उसके घर पर जाकर लिए जाते या फिर वन स्टाप सेंटर पर। डीआईजी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि  पूरे मामले की विवेचना की जा रही है। हर प्वाइंट पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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दो आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
अगर हम पूरे घटनाक्रम की बात करें तो थाना पाली क्षेत्र के एक मुहल्ला निवासी 13 वर्षीय किशोरी को 22 अप्रैल के दिन पाली के ही चंदन, राजभान, हरिशंकर और महेंद्र चौरसिया बहला फुसलाकर ले गए थे। किशोरी को भोपाल ले जाया गया था। वहीं किशोरी की मां 23 अप्रैल को पुलिस कप्तान के पास पहुंची और बेटी के गायब होने की बात बताई। साथ ही आरोपियों के नाम भी पुलिस को बताए गए।
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आरोपी एसओ गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
एसपी ने तत्काल थानाध्यक्ष पाली को निर्देश दिए कि किशोरी को बरामद करें। जब पुलिस ने हाथ पांव मारे तो आरोपी किशोरी को पुलिस के पास छोड़कर फरार हो गए। आरोपियों ने कहा कि वह किशोरी को लेकर नहीं गए थे बल्कि किशोरी भटक गई थी। वह उसको ढूंढकर लाए हैं।

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आरोपी एसएचओ तिलकधारी सरोज (इनसेट) और दो अन्य आरोपी गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
थानाध्यक्ष ने किशोरी की मौसी को बुलवाया और उसके सुपुर्द कर दिया। अगले दिन 27 अप्रैल को किशोरी को बयान दर्ज कराने के नाम पर फिर थाने में बुला लिया गया। थाने में किशोरी के साथ थानाध्यक्ष तिलकधारी सरोज ने दुष्कर्म किया। अब इस पूरे घटनाक्रम में एक सवाल यह उठ रहा है कि थानाध्यक्ष ने दुष्कर्म पीड़िता को थाने पर बुलाया क्यों।
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आरोपी एसओ गिरफ्तार - फोटो : सोशल मीडिया
जब मुकदमा दर्ज ही नहीं हुआ था तो बयान किस बात के हो रहे थे। इस पर डीआईजी जोगेंद्र सिंह ने बताया कि पहले मुकदमा होना चाहिए था फिर बयान होते। बयान के लिए किशोरी को थाने पर बुलाया ही नहीं जा सकता। अगर बयान दर्ज करने थे तो उसके घर पर जाकर लिए जाते। इन सब मामलों में थानाध्यक्ष दोषी है। 
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