छठ पर्व के चौथे दिन महिलाओं ने 36 घंटे निर्जला व्रत रहने के बाद गुरुवार सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद घाट किनारे बनी बेदी के सात व 11 चक्कर लगाकर एक दूसरे को प्रसाद वितरण किया। जिसके बाद महिलाओं ने घर आकर प्रसाद खाकर व्रत का पारण किया।
घाटों के किनारे सुबह से ही लोगों की भीड़ एकत्र होने लगी थी। कानपुर के घाटों पर भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए। पनकी, अरमापुर, सीटीआई, साकेत नगर, शास्त्री नगर आदि जगहों पर लोगों को अखिल भारतीय भोजपुरी महासभा की ओर से कच्चे दूध का निशुल्क वितरण किया गया। जिससे महिलाओं ने उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। महिलाओं ने बहंगी लचकत गाए, सबे बरत करत ऐ धनी, तू हूं बरत करत... आदि लोकगीत गाए।
विज्ञापन
2 of 5
छठ पर्व 2021
- फोटो : अमर उजाला
गुरुवार सुबह को पनकी, अर्मापुर, सीटीआई, दबौली, मिश्री घाट चौराहा, साकेत नगर, सरसैया घाट, गोला घाट, छोटा सेंट्रल पार्क, बड़ा सेंट्रल पार्क, शास्त्री नगर आदि जगहों पर महिलाएं सिर पर बांस की डलिया में प्रसाद रखकर पहुंचीं।
विज्ञापन
3 of 5
छठ पर्व 2021
- फोटो : अमर उजाला
डलिया में ठेकुआ, नींबू, गन्ना, शहद, कपूर, गाजर, शकरकंद, सिंघाड़ा समेत अन्य पूजन सामग्री थी। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद उन्हें यह सामग्री अर्पित की।
4 of 5
छठ पर्व 2021
- फोटो : अमर उजाला
बीती रात महिलाओं ने घरों में छठ माई के गीत गाकर उनका गुणगान किया। निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं व पुरुषों ने अपने बच्चों के दीर्घायु की छठ माई से कामना की।