लैब टेक्नीशियन संजीत यादव अपहरण हत्याकांड में तत्कालीन एसपी साउथ आईपीएस अपर्णा विभागीय जांच में दोषी पाई गईं हैं। जांच अफसर ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। अब शासन अपने स्तर से जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करेगा। वर्तमान में हत्याकांड की जांच सीबीआई कर रही है।
22 जून 2020 को बर्रा निवासी संजीत यादव का अपहरण हो गया था। चार दिन बाद बदमाशों ने तीस लाख की फिरौती मांगी थी। 24 जुलाई 2020 को पुलिस ने खुलासा कर दावा किया था कि संजीत यादव के दोस्त ने साजिश रचकर उसका अपहरण किया और उसकी हत्या कर शव पांडु नदी में फेंक दिया।
पुलिस ने सात आरोपियों को जेल भेजा था। मामले में शासन ने उस वक्त तत्कालीन एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता व तत्कालीन सीओ गोविंद नगर मनोज कुमार गुप्ता समेत दस पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था। तत्कालीन एसएसपी दिनेश कुमार पी का झांसी ट्रांसफर कर दिया गया था।
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड
- फोटो : amar ujala
अपर्णा के खिलाफ एक आईजी रैंक के अफसर ने विभागीय जांच की। गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक जांच में अपर्णा गुप्ता दोषी पाई गईं हैं। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में अपर्णा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की संस्तुति की गई है। वर्तमान में अपर्णा मुरादाबाद में एसपी रेलवे हैं। अक्तूबर महीने में ही वह बहाल हुईं थीं।
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संजीत अपहरण एवं हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला
कई अहम तथ्य जांच में सामने आए
अपहरण के बाद जब बदमाशों ने फिरौती के लिए कॉल की थी तब 13 जुलाई 2020 को पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया था। पुलिस की मौजूदगी में बदमाश फिरौती भरा बैग लेकर फरार हो गए थे। इसके बाद अपर्णा गुप्ता ने बयान जारी कर दावा किया था कि फिरौती का बैग देने के दौरान पुलिस मौजूद नहीं थी। मगर उसके चंद घंटे बाद उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह यह कहते सुनाई दे रही थीं कि हम लोग ओवरब्रिज पर थे तब तक बदमाश बैग लेकर चंपत हो गए। इससे उनके झूठ का पर्दाफाश हुआ था। यह तथ्य भी जांच में शामिल किया गया था। इसके अलावा नाकाम पर्यवेक्षण व पीड़ित परिवार के साथ समन्वय न स्थापित कर पाने का दोषी पाया गया है।
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सामने नहीं ला सके नोट खरीदार
पुलिस ने दावा किया था कि बैग में फिरौती की रकम नहीं थी। उसमें नकली नोट थे। एक दुकानदार को भी पुलिस सामने लाई थी। उसने दावा किया था कि नकली नोट उससे खरीदे गए थे। मगर नोट उस दुकानदार से किसने खरीदे थे या लिए थे पुलिस अफसर नहीं बता सके थे। जांच अधिकारी ने इस तथ्य को शामिल कर सीधे तौर पर अपर्णा गुप्ता पर सवाल खडे़ किए।
कारोबारी की पैरवी नहीं आई काम
सूत्रों के मुताबिक बरेली के एक कारोबारी/बिल्डर ने आईपीएस अपर्णा गुप्ता के पक्ष में पुलिस के उच्चाधिकारियों से पैरवी की थी। जिससे अपर्णा पर जांच में नरमी बरती जाए। उच्चाधिकारियों ने इसके लिए प्रयास भी किया लेकिन उनकी मेहनत काम नहीं आई। जांच अधिकारी ने वही किया जो तथ्य व साक्ष्य थे।