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पुरुषोत्तम मास में धार्मिक आयोजनों से मिलता है अक्षय पुण्य

Mon, 21 May 2018 02:48 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमाे पिक
 वर्ष के 12 मास में प्रत्येक माह के राशि, नक्षत्र और देवता होते हैं परंतु कालचक्र की गणना के अनुसार प्रत्येक चौथे वर्ष पड़ने वाला ज्येष्ठ मास पुरुषोत्तम मास कहलाता है।
 
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पुरुषोत्तम ही परमात्मा है। इसलिए इस मास में भक्ति व धार्मिक आयोजनों से पुण्य की प्राप्ति होती है। ये प्रवचन सुनाए अयोध्या के कथावाचक आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने। वह कानपुर नवाबगंज स्थित जागेश्वर मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन दे रहे थे।
 
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ब्रह्मांणोत्सव वैदिक विज्ञान मंडल की ओर से आयोजित कथा में उन्होंने कहा कि प्रभु ने पुरुषोत्तम मास में ही हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए वर्ष में 13वें मास की कालगणना की थी।
इस मास को भक्ति व उपासना की दृष्टि से श्रेष्ठ माना गया है।
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इस महीने किए गए पुण्य कार्य फलदायी होते हैं। इससे पहले आचार्य उमेश दत्त शुक्ल, आचार्य कुमार गौरव शुक्ल व चित्रकूट धाम के आचार्य नवलेश ने व्यास पीठ का पूजन किया। इस मौके पर योगेश भसीन, प्राण श्रीवास्तव, दीपक तिवारी, कौशल किशोर पांडे, कमल शंकर मिश्रा, अतुल गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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