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स्तनपान कराने में इस जिले की माताएं हैं अव्वल, ये भ्रांतियां तोड़ 'शिशुओं को पिलाएं अमृत'

Mon, 09 Apr 2018 09:14 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमाे पिक
जन्म के एक घंटे के अंदर शिशु को स्तनपान कराना बेहद जरूरी है। शिशु के लिए मां का दूध अमृत के समान होता है पर, भ्रांतियों के चलते ज्यादातर महिलाएं इस पर जोर नहीं देतीं। बावजूद इसके राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे टीम ने प्रदेश में सर्वे कर एक रिपोर्ट तैयार की। जिसमें इलाहाबाद मंडल में छह माह तक स्तनपान करने वाले बच्चों के प्रतिशत में फतेहपुर अव्वल रहा है।

 
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डेमाे पिक
चिकित्सकों के मुताबिक स्तनपान शिशु को न सिर्फ स्वस्थ रखने और भरपूर पोषण देने का काम करता है बल्कि उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने व समुचित विकास में मदद करता है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग भी गंभीर है। ग्रामीणांचलों में आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। पिछले दिनों हुए मंडलीय सर्वे में छह माह तक स्तन पान करने वाले शिशुओं की रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें फतेहपुर जनपद 46.6 फीसदी के साथ सबसे अधिक रहा, इसी प्रकार इलाहाबाद 35.4 फीसदी से दूसरे जबकि कौशांबी 35.1 फीसदी के साथ तीसरे स्थान पर रहा। और प्रतापगढ़ 21.7 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर रहा। पूरे उत्तर प्रदेश में यह प्रतिशत सीएमओ डा. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि मंडलीय रिपोर्ट आई है। सुरक्षित प्रसव और प्रसव के बाद जच्चा व बच्चा को स्वस्थ रखने के लिए लगातार कैंप लगाकर जागरूकता फैलाई जा रही है। 
 
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शिशु के लिए अमृत समान है मां का दूध: डा. रेखारानी 
फतेहपुर। महिला चिकित्सालय की सीएमएस डा. रेखारानी ने बताया कि मां के स्तन से निकलने वाला पीला गाढ़ा दूध जिसे कोलेस्ट्रम कहते हैं, शिशु के लिए अमृत के समान होता है। शिशु को संक्रमण से बचने और उसकी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलती है। 

 
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भ्रांतियां तोड़ कराएं स्तनपान: सैनी
सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च की डिवीजनल कोआर्डिनेटर प्रीती सैनी का कहना है कि महिलाएं तमाम भ्रांतियों के चलते बच्चों को स्तनपान कराने से दूर रहती हैं। पर, बच्चों के लिए उनका दूध अमृत है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने व समुचित विकास में भी मदद करता है। फतेहपुर में तीन साल तक के बच्चों के कोलस्ट्रम यानी पहला दूध पीने के प्रतिशत में मंडल में कुछ कमी दिखी है। इसके लिए जागरूकता शिविर लगाने और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
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