बिकरू कांड में पुलिस ने मंगलवार को पूरक चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में सिर्फ उमाशंकर का नाम है। कुछ समय पहले ही जेल भेजे गए आरोपी विपुल दुबे के खिलाफ अभी जांच जारी है। हैरानी की बात यह है कि चार्जशीट में मनु पांडेय का नाम नहीं है।
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कानपुर एनकाउंटर
- फोटो : अमर उजाला
स्पष्ट है कि पुलिस ने अभी मनु को आरोपी नहीं बनाया है। जांच जारी रहने का हवाला दिया है। बिकरू कांड में एक नवंबर को पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में जेल भेजे गए 34 आरोपियों के अलावा मुठभेड़ में मारे गए बदमाशों के नाम भी थे।
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- फोटो : amar ujala
उमाशंकर और विपुल फरार थे। इनके खिलाफ जांच चल रही थी। वहीं मनु पांडेय को लेकर पुलिस ने दावा किया था कि उसके खिलाफ साक्ष्य हैं, लेकिन उनकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। इस बीच पुलिस ने उमाशंकर और फिर विपुल को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
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मंगलवार को पुलिस ने माती कोर्ट में उमाशंकर के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की है। उस पर वारदात में शामिल रहने के साथ-साथ साजिश रचने का आरोप है। केस की सभी धाराओं में आरोपी बनाया गया है।
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एसपी ग्रामीण बृजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि विपुल की गिरफ्तारी हाल में की गई है, इसलिए उसके खिलाफ अभी सबूत जुटाए जा रहे हैं। दूसरी पूरक चार्जशीट उसके खिलाफ दाखिल की जाएगी। उमाशंकर के खिलाफ पुलिस ने सीडीआर समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य कोर्ट में पेश किए हैं।
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आखिर मनु पांडेय को लेकर संशय क्यों
बिकरू कांड में मनु पांडेय को लेकर पुलिस ने शुरू से ही संशय बनाए रखा है। उसकी तमाम कॉल रिकॉर्डिंग वायरल हुई थीं। आवाज की पुष्टि हो चुकी है। रिकार्डिंग से साबित हो चुका है कि उसे वारदात की पूरी जानकारी थी। घटना के वक्त ससुर (प्रेम कुमार पांडेय एनकाउंटर में मारा गया) और पति (शशिकांत पांडेय, जेल में) को उसी ने बुलाया था।
पुलिस ने चार अन्य महिलाओं को तो जेल भेज दिया मगर उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने पहली चार्जशीट में उसके खिलाफ साक्ष्य होने की बात कही लेकिन पूरक चार्जशीट में उसका नाम नहीं है। ऐसा क्यों, इस सवाल का जवाब पुलिस अफसर नहीं दे रहे हैं।