कानपुर में हेयर ट्रांसप्लांट मामले में नया खुलासा हुआ है। हेयर ट्रांसप्लांट से पहले प्रोटोकॉल का पालन नहीं हुआ। हेयर प्लांट से पहले सेंसिटिविटी टेस्ट होता तो विनीत की जान बच जाती। स्वास्थ्य विभाग की कमेटी की जांच में यह तथ्य सामने आए हैं।
कानपुर के हेयर ट्रांसप्लांट के विनीत दुबे की मौत के मामले में जांच कमेटी ने डॉक्टरों के बयान दर्ज किए। इलाज के अभिलेखों में मौत का कारण सेप्टिक और एनाफिलैक्टिक शॉक बताया गया। इससे सवाल खड़ा हुआ कि अगर विनीत के हेयर ट्रांसप्लांट करने में प्रोटोकॉल का पालन होता और सेंसिटिविटी टेस्ट कर लिया जाता तो यह नौबत न आती है। एनाफिलैक्टिक शॉक किसी रसायन से तीव्र और जानलेवा एलर्जिक प्रक्रिया होती है।
सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की जांच कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली है। कमेटी अभी कुछ और बिंदुओं पर जांच करेगी। इसी वजह से सीएमओ को रिपोर्ट नहीं सौंपी गई। इस संबंध में प्लास्टिक सर्जन की भी राय लेने के संबंध में विचार किया जा रहा है।
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Hair Transplant Scam
- फोटो : अमर उजाला
अभिलेखों की जांच से पता चला कि एनाफिलैक्टिक शॉक से ही विनीत दुबे मल्टी ऑर्गन फेल्योर की स्थिति में गए। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में बताया गया कि विनीत के सिर में द्रव्य भरा था। विसरा के साथ इसे भी जांच के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम शिवराजपुर सीएचसी के डॉ. पियूष ने किया।
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विनीत दुबे की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद
कमेटी ने उनके भी बयान दर्ज किए। इसके अलावा विनीत का चेहरा नीला पड़ गया था। सिर पर बाल नहीं थे। सिर पर टांकों के निशान मौजूद रहे। आंतरिक परीक्षण में मस्तिष्क की झिल्लियों, फेफड़ों, तिल्ली, गुर्दों में सूजन पाई गई। सिर के बाएं भाग में छिले होने और खुरचने के निशान मिले।
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डॉ. अनुष्का तिवारी
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हेयर ट्रांसप्लांट के बाद 36 घंटे जिंदा नहीं रह पाए विनीत
हेयर ट्रांसप्लांट कराने के बाद विनीत 36 घंटे भी जिंदा नहीं रह पाएं। निजी अस्पताल से मिले दस्तावेजों के अनुसार रोगी को पहले छपेड़ा पुलिया स्थित अस्पताल लेकर गए और उसके बाद सर्वोदय नगर के निजी अस्पताल में 14 मार्च 2025 को भर्ती कराया। फिजीशियन के अनुसार रोगी एंबु बैग के साथ आया था, उसे देखकर तुरंत ही आईसीयू में भेज दिया।
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मयंक कटियार की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद
अस्पताल ने कमेटी को भेजे दस्तावेजों में जिक्र किया कि 13 मार्च को इंपायर क्लीनिक में हेयर ट्रांसप्लांट हुआ। तबियत बिगड़ी और अगले दिन रोगी अस्पताल में भर्ती हुआ।वो एक अन्य अस्पताल से सहायक वेंटीलेशन पर आया था। उसे सीपीआर दिया गया। रोगी बेहोश था। रोगी की 15 मार्च 2025 को सुबह 05 बजकर 07 मिनट पर मौत हो गई।
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बालों की समस्या
- फोटो : Freepik.com
बीपी 110-72, हार्ट रेट 136
कमेटी ने पाया कि विनीत टाइप-2 डाइबिटीज का रोगी था। उसे उच्च रक्तचाप की समस्या भी थी। इसके अलावा वो मोटापे से भी जूझ रहा था। उसका वजन 90 किलो था। बीएमआई के अनुसार वजन 15 से 20 किलो ज्यादा था। रोगी की हार्ट रेट 136 थी।
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बालों की समस्या
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नौसिखिया की तरह किया हेयर ट्रांसप्लांट
विनीत का हेयर ट्रांसप्लांट करने में कोई सतर्कता नहीं बरती गई। कमेटी का मानना है कि नौसिखिया तरीके से हेयर ट्रांसप्लांट किया गया। दस्तावेजों में एनाफिलैक्टिक शॉक की पुष्टि हुई है। इससे जाहिर है कि हेयर ट्रांसप्लांट में ओटी से लेकर दवाएं देने तक में नौसिखिया तरीका अपनाया गया।
अभिलेखों से यह माना जा रहा है कि सेंसटिविटी टेस्ट न होने, दवा की डोज ज्यादा होने, ओटी में पहले से संक्रमण होने और विनीत के बीपी, ब्लड शुगर के रोगी होने की वजह से एनाफिलैक्टिक शॉक आया। यह कंट्रोल नहीं हुआ। इससे विनीत की जान चली गई।
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विनीत दुबे की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद
कमेटी के सदस्यों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही कोई योग्य चिकित्सक नहीं कर सकता। जब कोई पहले से बीपी, ब्लड शुगर और मोटापे जैसी समस्याओं से ग्रसित होता है तो उस पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता होती है। थोड़ा सा भी बीपी और ब्लड शुगर बढ़ा होने पर कई बार सर्जरी रोक दी जाती है।
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Hair Transplant
- फोटो : अमर उजाला
एनेस्थेसिया की दवाएं आम दवाओं की तरह नहीं होती हैं। इनका असर अधिक प्रभावी होता है। ऐसे रोगियों में अगर दिक्कत हो तो संभालना मुश्किल हो जाता है। इंपायर क्लीनिक भी जांच के लिए गए थे, लेकिन क्लीनिक बंद था। इसलिए ओटी का अवलोकन नहीं कर पाए।
यह होता सेंसिटिविटी टेस्ट
सीनियर अनेस्थेटिस्ट डॉ. अनिल वर्मा का कहना है कि आम रोगियों में एनेस्थेसिया देने से पहले एक संवेदनशीलता जांच (सेंसिटिविटी टेस्ट) कराते हैं। इसमें 0.1 एमएल दवा मरीज के शरीर में इंजेक्ट की जाती है। अगर रोगी की त्वचा पर लाल चकत्ता पड़ता है तो फिर उस दवा को नहीं देते।