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UP: पेड़ की टहनियां... कंबल-चादर, ऐसे फांदी 22 फीट ऊंची दीवार; जश्न मनाते रहे अफसर, बंदियों के भागने की कहानी

Tue, 06 Jan 2026 11:03 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, कन्नौज

सार

यूपी की कन्नौज जेल से दो बंदी कंबल और चादर की रस्सी के सहारे 22 फीट ऊंची दीवार फांद कर भाग गए। जिला कारागार में नए साल का जश्न चल रहा था। जेलर, डिप्टी जेलर समेत चार को निलंबित कर दिया गया है। शासन ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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Kannauj jail break - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कन्नौज जिला कारागार में पुलिसकर्मी और अफसर नए साल का जश्न मनाने में मशगूल रहे। इसी बीच दो विचाराधीन बंदी कंबलों की रस्सी बनाकर 22 फीट ऊंची दीवार फांदकर भाग गए। जेल प्रशासन को तब जानकारी हुई, जब बैरकों में गिनती कराई गई। दो बंदियों के भागने से जेल में खलबली मच गई। शासन ने डिप्टी जेलर समेत चार को निलंबित कर डीआईजी जेल को जांच सौंपी है। साथ ही डीएम से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

अनौगी स्थित जिला कारागार में रविवार की रात नए साल पर पार्टी का आयोजन किया गया था। पुलिसकर्मियों समेत सभी अफसर जश्न मनाने में मशगूल थे। उसी समय विचाराधीन बंदी तालग्राम थाना क्षेत्र के ग्राम हजिरापुर निवासी अंकित व ठठिया थाना क्षेत्र के ग्राम मलगवां निवासी शिवा उर्फ डिंपी कंबलों की रस्सी बनाकर 22 फीट ऊंची दीवार फांदकर भाग गए। 
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जिला कारागार का निरीक्षण करते डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री व एसपी विनोद कुमार - फोटो : amar ujala
अंकित धान की ट्रॉली चोरी करने के आरोप में जेल में बंद था, जबकि डिंपी नाबालिग के अपहरण के मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत निरुद्ध था। पुलिस के मुताबिक बंदियों ने महिला बैरक के पास कंबलों की रस्सी में सरिया का एक टुकड़ बांधा और उसे दीवार के ऊपर बने पिलर से निकली सरिया में फेंक कर फंसा दिया। इसके बाद दोनों दीवार पर चढ़ गए और दूसरी तरफ खेतों में कूद कर भाग गए। वॅाच टॉवरों पर भी निगरानी नहीं हो रही थी, जिससे बंदियों को भागने में आसानी रही। 
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जिला कारागार में कंबलों की रस्सी देखते गुरसहायगंज कोतवाल अजय अवस्थी - फोटो : amar ujala
सोमवार सुबह 10 बजे जब जेल की बैरकों में बंदियों और कैदियों की गिनती हुई, तब दो बंदी कम होने की जानकारी हुई। इस घटना से जेल प्रशासन में खलबली मच गई। आनन-फानन कारागार पुलिसकर्मी बस स्टेशन व रेलवे स्टेशन पर दोनों बंदियों को खोजने लगे। जानकारी मिलने पर डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री, एसपी विनोद कुमार जेल पहुंचे और कारागार अधीक्षक भीमसेन मुकुंद से पूछताछ की। 
 

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फरार बंदी अंकित और शिवा उर्फ डिंपी - फोटो : amar ujala
डीएम की संस्तुति पर शासन ने बैरक प्रभारी शिवेंद्र सिंह यादव, हेड जेल वार्डर शिवचरण, डिप्टी जेलर बद्री प्रसाद और जेलर विनय प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया और मामले की जांच कानपुर के डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता को सौंपी गई है। देर शाम डीआईजी जेल ने कारागार का निरीक्षण किया। पूरे मामले में जेल अधीक्षक की लापरवाही सामने आई है। डीआईजी ने बताया कि जांच के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
 
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जेल की चहारदीवारी के किनारे खाली वॉच टॉवर - फोटो : amar ujala
वॉच टावरों से नहीं हो रही थी निगरानी, योजनाबद्ध तरीके से भागे बंदी
कन्नौज जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर स्थित कारागार में बंदियों की निगरानी भगवान भरोसे है। जेल के चारों कोनों पर वॉच टॉवर तो बनाए गए हैं, पर उनमें कोई नहीं जाता है। यही वजह है कि 22 फीट ऊंची दीवार पर कंबलों से बनी रस्सी के सहारे दो विचाराधीन बंदी भाग और जेल प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। योजनाबद्ध तरीके से बंदी भागे हैं, इसकी कहानी वह रस्सी बता रही है जो कंबलों और बिछाने वाली चादरों समेत पौधों की टहनियों को लपेटकर बनाई गई थी।
 
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जेल से भागा अंकित - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रविवार रात को जेल परिसर में नए साल का जश्न चल रहा था। जेल अधिकारी और कर्मचारी परिवार के सदस्यों के साथ डीजे की धुन पर थिरक रहे थे और गाने गा रहे थे। इस दौरान जेल के कैदियों पर किसी का ध्यान नहीं गया। कैदियों ने इसी मौके का लाभ उठाते हुए जेल के अंदर से कंबलों को इकट्ठा किया और उन्हें आपस में जोड़कर एक मजबूत रस्सी तैयार की। 
 
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जेल से भागा शिवा ऊर्फ डिंपी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इस रस्सी के सहारे वह जेल की करीब 22 फीट ऊंची पूर्वी दीवार पर चढ़ गए और कूदकर बाहर निकल गए। रात में कैदियों की गिनती नहीं की गई थी, जिसका फायदा भी उन्हें मिला। जेल में पार्टी का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसकी संवाद न्यूज एजेंसी पुष्टि नहीं करती है। हालांकि जेल प्रशासन वीडियो पुराना बता रहा है। अन्य कैदियों ने डीएम व एसपी को बताया कि वॉच टॉवरों कोई भी नहीं रहता है। साल भर ये खाली रहते हैं। डीआईजी जेल प्रदीप गुप्ता को भी यही बात बताई गई है। इसी आधार पर जेल अधीक्षक की सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई है।
 

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जेल से भागा अंकित - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुबह गिनती में खुला राज, मचा हड़कंप
सोमवार सुबह करीब 10 बजे जब जेल के सभी कैदियों और बंदियों को बैरकों से बाहर निकाला गया और उनकी गिनती शुरू हुई, तब दो कैदियों के कम होने का पता चला। जेल प्रशासन ने पहले इस मामले को छिपाने की कोशिश की और अपने स्तर पर कैदियों की तलाश जारी रखी। जिलाधिकारी आशुतोष मोहन अग्निहोत्री व एसपी विनोद कुमार को इस घटना की जानकारी मिल गई। वह संपूर्ण समाधान दिवस बीच में छोड़कर सीधे जिला पहुंचे और प्रारंभिक जांच कर सूचना शासन को दी।
 

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माइक लेकर गाना गाते जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद - फोटो : amar ujala
का करूं सजनी आए न बालम...गीत पर झूमे लोग
दो विचाराधीन बंदियों के फरार होने के बाद जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह जेल के अंदर पार्टी में माइक पर स्वर लहरियां बिखेरते दिख रहे हैं। इसमें वह का करूं सजनी आए न बालम...ठुमरी सुनाकर तालियां बटोर रहे हैं। इसके अलावा डीजे की धुनों पर बंदी रक्षक व अफसर थिरक रहे हैं। खास बात यह है कि जश्न के सभी वीडियो जेल अधीक्षक ने अपने व्हॉट्स एप स्टेटस पर अपलोड किए हैं। दावा किया जा रहा है कि डीजे बजाकर पार्टी की गई थी, जिसकी जानकारी बंदियों को पहले से थी और उन्होंने इसी का फायदा उठाने की योजना बनाई। वहीं, जेल अधीक्षक का कहना है कि यह वीडियो दो दिन पुराना है।

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जिला कारागार में जश्न के दौरान नाच रहा बंदी रक्षक - फोटो : amar ujala
पैसा दो...जेल में मिलेगी हर सुविधा
जिला कारागार का हाल यह है कि यहां बंदियों और कैदियों को सिर्फ पैसा खर्च करना पड़ता है, हर सुविधा मिल जाती है। बताया जा रहा है कि यहां नए बंदियों की मशक्कत काटने के लिए 25 हजार रुपये तक लिए जाते हैं। पहले जेल अधीक्षक अकरम खान के समय पांच हजार रुपये लिए जाते थे, लेकिन जब से भीमसेन मुकुंद आए हैं, तब से यह बढ़ा दी गई। इतना ही नहीं जेल के अंदर पान मसाला, गुटखा, बीड़ी, सिगरेट व शराब की सप्लाई भी पैसे लेकर हो रही है। इसके लिए बंदियों व कैदियों से दोगुने दाम तक वसूल किए जा रहे हैं। कैंटीन में खाने के नाम पर भी वसूली हो रही है।
 

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कारागार परिसर में नए साल की पार्टी में शामिल लोग - फोटो : amar ujala
मां-बाप का साया छिना तो अपराध की दुनिया में आया अंकित
तालग्राम के क्षेत्र के हाजिरपुर निवासी फरार बंदी अंकित (24) के पिता प्रेमचंद्र मानसिक रूप से बीमार होने से दस साल पहले लापता हो गए थे। अभी तक वह घर वापस नहीं लौटे। दस वर्ष की उम्र छोटी बहन को लेकर मां भी कहीं चली गई। गांव बालों ने बताया कि परिवार के लोगों ने भी संबंध तोड़ लिया। इससे कम उम्र में इधर-उधर भटकने लगा। पिता की जमीन को किराये पर देकर मौज मस्ती करने लगा। इस दौरान वह गलत संगत में पड़ गया। ठठिया थाना पुलिस ने 20 दिसंबर 2025 को तमंचा कारतूस और चोरी की बाइक के साथ गिरफ्तार किया।
 

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जिला कारागार कन्नौज - फोटो : अमर उजाला
उसने तीन दिसंबर को औसेर क्षेत्र से धान लदी पिकअप चोरी कर धान बेचना कबूल किया था। सात नवंबर को गुरुग्राम राजेंद्र पार्क से कार चोरी का भी आरोप लगा था। 21 दिसंबर को जेल भेजा गया और पांच जनवरी को जेल से फरार हो गया। थानाध्यक्ष ध्यानेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जेल से फरार आरोपी को गांव में दबिश दी गई है। जानकारी में आया है कि वह कहीं बाहर रह रहा है। गांव से कोई खास वास्ता नहीं है। पुलिस के अनुसार जमीन आरोपी अंकित के पिता के नाम होने के कारण बिक्री नहीं कर सका। जबकि कुछ साल पहले मकान बेच दिया है। ठठिया क्षेत्र निवासी नाना के यहां बचपन रहा है।
 

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को बंदियों के जेल से भागने के बाद जांच करती पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पिता की मौत के बाद आवारा हो गया था डिंपी
मलगवां गांव निवासी फरार बंदी शिवा उर्फ डिंपी (25) पिता की मौत के बाद आवारा हो गया था। उस पर किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप था। करीब छह महीने पहले आरोपी युवक सदर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी किशोरी को अपने साथ लेकर चला गया था। किशोरी के अचानक लापता होने पर परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग न मिलने पर सदर कोतवाली में युवक के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। 
 
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को बंदियों के जेल से भागने के बाद जांच के लिए आते अफसर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आरोपी युवक को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय के आदेश पर आरोपी को अगस्त माह में जिला जेल भेज दिया गया था। परिजनों के अनुसार आरोपी डिंपी उर्फ शिवा के पिता भजन लाल की लगभग 20 वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद से वह अपनी मां कमला देवी और बड़े भाई हरिश्चंद के साथ गांव में रहता था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है। उसका बड़ा भाई मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है।

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