मनीष गुप्ता हत्याकांड में एसआईटी की जांच में एक और खुलासा हुआ है। वारदात की रात आरोपी इंस्पेक्टर और एक दरोगा नशे की हालत में होटल के कमरे में दाखिल हुए थे। जहां चेकिंग और पूछताछ के दौरान पुलिसकर्मियों से मनीष की कहासुनी हो गई थी। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। मनीष हत्याकांड की जांच में जुटी एसआईटी के साथ मनीष के ममेरे भाई आशीष और बहनोई रोहित गुप्ता भी गोरखपुर गए थे। पांच दिनों तक वह टीम के साथ रहकर पूरी तफ्तीश में शामिल रहे। गुरुवार को वह पुलिस के साथ शहर लौटे। पुलिस ने लिखापढ़ी कर दोनों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया। आशीष व रोहित का कहना है कि वह एसआईटी की जांच से संतुष्ट हैं। एक-एक पहलू पर गहनता से पुलिस अधिकारी जांच कर रहे हैं।
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मृतक व्यापारी मनीष गुप्ता व मानसी अस्पताल के बाहर मौजूद पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला।
एसआईटी की जांच लगभग 95 प्रतिशत तक पूरी हो गई है। होटल कर्मियों व अस्पताल कर्मियों के बयान, सीसीटीवी फुटेज की जांच में पता चला कि रामगढ़ताल थानाप्रभारी जगत नारायाण सिंह, एसआई अक्षय मिश्रा नशे की हालत में टीम संग मौके पर पहुंचे थे। जहां विवाद के बाद पुलिस कर्मियों ने मनीष को पीट-पीटकर मार दिया। पुलिस को कई अन्य सबूत भी हाथ लगे हैं। जो हत्यारोपियों को सजा दिलाने के लिए प्रयाप्त हैं।
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मनीष हत्याकांड: मौके पर हत्यारोपी दरोगा जेएन सिंह सीसीटीवी में कैद हो गया।
- फोटो : अमर उजाला।
झूठ की कहानी खुली
हत्यारोपी पुलिसकर्मी हत्या को हादसा साबित करने के लिए होटल से लेकर मेडिकल कॉलेज तक झूठे सबूत तैयार कर गए थे। जो एसआईटी की जांच में फर्जी निकल गए। उन्होंने होटल कर्मियों को भी झूठे बयान देने को कहा था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार फरार इंस्पेक्टर और एसआई अरुण पर सत्ताधारी नेताओं का भी हाथ है। मीनाक्षी बोलीं, नियुक्ति से पहले हत्यारोपियों की गिरफ्तारी चाहिए
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मनीष हत्याकांड: मनीष का दोनों हाथ, दोनों पैर पकड़ ले जाती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला।
मनीष की पत्नी मीनाक्षी की केडीए में ओएसडी पद की नौकरी के लिए शासन की हरी झंडी मिल गई है। शासन ने गुरुवार को ही उनके घर पर संस्तुति पत्र भेज दिया था। जल्द ही कागजी कार्रवाई पूरी कराने के बाद मीनाक्षी को नौकरी मिल जाएगी।
मनीष हत्याकांड: कमरे से बाहर लेटे मनीष को तौलिया लेकर देते दरोगा।
- फोटो : अमर उजाला।
संस्तुति पत्र मिलने के बाद मीनाक्षी का कहना है कि नौकरी परिवार के लिए जरूरत है, लेकिन उनकी प्राथमिकता पति के हत्यारोपियों को सजा दिलाना है। जब तक हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनका कहना था कि मुझे नौकरी नहीं, पहले मेरे पति के हत्यारे पुलिस वालों की गिरफ्तारी चाहिए।