फर्रुखाबाद जिला जेल में उपद्रवी बंदियों को शांत करने में एक अधिकारी ने खासी भूमिका निभाई। उन्होंने मातहत से सरकारी असलाह लेकर कई राउंड फायरिंग की। इस दौरान ही शिवम को गोली लग गई थी। पोस्टमार्टम में शिवम के शरीर से गोली निकलने से कई जिम्मेदारों के माथे पर बल पड़ गए हैं। जांच के बाद गोली का बोर तय करेगा कि किसकी गर्दन फंसेगी। जेल में बवाल शांत होने के बाद एसपी अशोक कुमार मीणा ने जेल मेें फायरिंग से साफ इनकार कर दिया था। पोस्टमार्टम में बंदी शिवम की गोली लगने ने मौत होने की पुष्टि के बाद उनका बयान सवालों के घेरे में आ गया है। जिला जेल के सूत्र बता रहे हैं कि एक अधिकारी ने अपने गनर से सरकारी असलाह लेकर फायरिंग का प्रयास किया, लेकिन असलहा नहीं चला। फिर उन्होंने दूसरे सुरक्षाकर्मी से असलाह लेकर कई राउंड फायरिंग की। इस दौरान गोली लगने से शिवम गिर पड़ा था।
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फर्रुखाबाद जेल में बवाल का मामला
- फोटो : अमर उजाला
इससे आशंका जताई जा रही है कि अधिकारी की फायरिंग में ही शिवम को गोली लगी है। जानकार बताते हैं कि जिस तरह से शिवम का पेट फटा था, उससे यह साफ है कि अत्याधुनिक व दमदार असलहे की गोली उसे लगी होगी। शिवम के पेट में मिली गोली कितने बोर की है इसकी पुष्टि बैलिस्टिक जांच के बाद ही हो पाएगी। उस बोर का हथियार पुलिसकर्मी या जेल अधिकारी के पास था। अन्यथा प्राइवेट असलह का इस्तेमाल किया गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडिया में शिवम ने मरने से पहले जेलर पर गोली मारने का आरोप लगाया था।
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फर्रुखाबाद जेल में बवाल के बाद बढ़ी चौकसी
- फोटो : अमर उजाला
लोहे से टकराने के बाद गोली लगने की आशंका
जानकार बताते हैं कि यदि अत्याधुनिक असलहे की गोली सीधे लगते तो चीरती हुई शरीर से निकल जाती। आशंका है कि अत्याधुनिक अलसहे से गोली चलने के बाद किसी लोहे से टकराकर शिवम के पेट में जा घुसी और कोख के पास हड्डी में फंस गई।
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फतेहगढ़ जेल में बवाल, मौके पर मौजूद पुलिस प्रशासन
- फोटो : amar ujala
पुलिस और जेल अधिकारियों में खींचतान
शिवम की मौत गोली लगने से होने की पुष्टि के बाद जेल व पुलिस अधिकारियों में खींचतान है। अधिकारी एक-दूसरे पर गोली का ठीकरा फोड़ने में लग गए हैं। इसके चलते ही डीजी जेल ने सोमवार को उपद्रव शांत कराने का डेमो कराकर देखा था।
फर्रूखाबाद जेल बवाल: जेल में तैनात फाेर्स
- फोटो : amar ujala
जेल से बरामद तमंचे की भी हो जांच
जेल से 315 बोर का एक तमंचा मिला था। पुलिस अधीक्षक ने वह तमंचा जेल की बाउंड्रीवाल के पास मिलने का दावा किया था। कहीं ऐसा तो नहीं कि जेल में बंदियों ने उस तमंचे से फायरिंग की हो और बाद में जेल के बाहर फेंक दिया हो। इससे उस तमंचे की जांच होना भी जरूरी है।