सीबीएसई 12वीं के रिजल्ट में बेटियों का दबदबा इस बार भी कायम है। इसमें सफल होने वालों में ज्यादातर लड़कियां हैं। यही नहीं, टॉपर्स की सूची में भी ज्यादातर लड़कियां ही शामिल हैं। शहर मेरा और इसे सुधारना भी मेरी जिम्मेदारी है। एक बार सेटेल हो जाऊं फिर एनजीओ का गठन करके शहर की हालत को सुधारूंगी। यह सिर्फ खोखले वादे नहीं है, इस सपने को जरूर साकार करूंगी। यह कहना है सर पदमपत सिंहानिया एजूकेशन सेंटर की छात्रा सौम्या सखूजा का। कॉमर्स संकाय की सौम्या को 97.4 फीसदी अंक मिले हैं। उन्होंने शहर में सातवीं संयुक्त रैंक हासिल की है। सौम्या बिजनेसमैन विशाल सखूजा और एकता सखूजा की बेटी आईआईएम से एमबीए करना चाहती हैं। सौम्या कहती हैं कि फिक्स रूटीन बेहद जरूरी है।
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सुहानी अग्रवाल मां के साथ
मेहनत का कोई शार्टकट नहीं होता। खुद का आंकलन और भरोसा करके ही सफलता को पाया जा सकता है। यह कहना है सर पदमपत सिंहानिया एजूकेशन सेंटर की छात्रा और सिटी की सेेकेंड टॉपर सुहानी अग्रवाल का। ह्यूमैनिटीज वर्ग में 98.4 परसेंट पाने वालीं की सुहानी कहती हैं कि परीक्षा के दौरान मैंने खुद को काफी रिलैक्स रखा। म्यूजिक भी सुना, किताबें भी पढ़ी, मोबाइल भी चलाया। विकास नगर की रहने वाली सुहानी के पिता डॉ. आशीष अग्रवाल नेत्र रोग विशेषज्ञ और मां शिप्रा अग्रवाल अनेथेस्टि हैं। क्लैट से लॉ करने का सपना संजोए सुहानी कहती हैं कि जो करें मन से करें, आप जरूर सफल होंगे।
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श्रेया शुक्ला मां के साथ
मरियमपुर स्कूल की छात्रा श्रेया शुक्ला ने 98 फीसदी अंक हासिल करके शहर में चौथा स्थान प्राप्त किया है। अपनी सफलता से गदगद श्रेया इसका श्रेय खुद की मेहनत को देना चाहती हैं। साइंस से 12 वीं पास करने वालीं श्रेया डॉक्टर बनना चाहती हैं। वह गुमटी में रहती हैं। वह बोलीं, मेरे नंबर मेरी सेल्फ स्ट्डीज की वजह से आए हैं। 12वीं के लिए मैंने कोई कोचिंग नहीं की, केवल स्कूल पर फोकस किया। श्रेया कहती हैं कि खुद का आत्मविश्वास आपको ऊंचाइयों तक ले जाता है। पांच से छह घंटे की रेगुलर पढ़ाई बेहद जरूरी है। श्रेया के पिता रामजी शुक्ला एकाउंटेंट और दीपा शुक्ला हाउस वाइफ हैं।
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रामदास ने किया शहर का नाम रोशन
आईआईटी कानपुर के मैकेनिकल विभाग में प्रोफेसर डॉ. नचिकेत तिवारी के बेटे रामदास तिवारी ने सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में सिटी में संयुक्त छठी रैंक प्राप्त की है। इस रैंक में दो छात्र और हैं। रामदास को साइंस वर्ग में 97.6 फीसदी अंक मिले हैं। रामदास कहते हैं कि पढ़ाई को एंज्याय करेंगे तो राहें खुद-ब-खुद आसान हो जाएंगी। डॉ. इंदिरा तिवारी के बेटे रामदास कहते हैं कि मैथ्स ओलंपियाड के दौरान कुछ दिनों के लिए दिल्ली गया था, वहां बच्चों की पढ़ाई के प्रति लगन देखकर मेरा मन बदल गया। मैं पढ़ाई के लिए और अधिक गंभीर हो गया। फिजिक्स से रिसर्च की फील्ड में जाने का सपना देखने वाले रामदास को बचपन से ही पिता डॉ. नचिकेत ने साइंस से रू-ब-रू करवाया।
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यश ने किया शहर का नाम रोशन
डीपीएस आजाद नगर के छात्र व पी रोड निवासी यश गुप्ता ने 97.6 प्रतिशत अंक पाकर सिटी में संयुक्त छठवीं रैंक हासिल की है। यश के पिता अजय कुमार गुप्ता कारोबारी हैं। वह अपनी सफलता का श्रेय स्कूल के शिक्षक व परिवार को देते हैं। यश कहते हैं, मुझे जितने की उम्मीद थी उतने ही प्र्रतिशत अंक आए हैं, अब आईएएस बनकर समाज के लिए कुछ काम करना चाहते हैं। यश स्कूल व कोचिंग के अलावा दो तीन घंटे की रोज सेल्फ स्टडी भी करते थे।
लालबंगला के तरुण कनोडिया 98.2 परसेंट के साथ शहर के संयुक्त थर्ड सिटी टॉपर हैं जबकि विज्ञान वर्ग में वह सिटी टॉपर बने हैं। शहर की ही यशविता शुक्ला ने भी 98.2 परेंसट पाए हैं। वह ह्यूमैनिटीज वर्ग की हैं। तरुण ने न्यू किंग्सटन सीनियर सेकेंड्री स्कूल, चकेरी से सीबीएसई 12वीं की परीक्षा दी थी। पिता अरविंद कनोडिया बिजनेसमैन और मां रंजना कनोडिया गृहिणी हैं। बड़ी बहन सोनल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है। तरुण ने दो दिन पहले ही जेईई मेंस के रिजल्ट में भी जलवा बिखेरा था। उन्हें ऑल इंडिया 63वीं रैंक मिली थी। तरुण बताते हैं कि अब वह जेईई एडवांस की तैयारी पर पूरी तरह से फोकस कर रहे हैं। इसमें भी अच्छा रैंक हासिल करना है। तरुण आईआईटी से इंजीनियरिंग करने के बाद आईएएस बनना चाहते हैं।