ज्योति शुक्ला के माता- पिता
ज्योति ने बताया कि गम हाथ में लगाने से बॉल चिपककर आती है। उसे फेंकने के लिए भी मजबूत पकड़ बनती है। विदेशी खिलाड़ी तो जूतों में भी इस गम का इस्तेमाल करते हैं। हम लोगों को ज्यादा अनुभव नहीं होता और गम कभी ज्यादा तो कभी कम लग जाता है। इससे भी खेल प्रभावित होता है। इस दौरे में जब पता चला कि हमारा मुकाबला मेडलिस्ट टीम साउथ कोरिया, चाइना, कजाकिस्तान, व नार्थ कोरिया से है, तभी लगने लगा था कि मेडल लाना बहुत मुश्किल होगा। ज्योति के साथ मां मीरा देवी, पिता शिव शंकर, कोच अतुल, दोस्त आकांक्षा और उनकी मां सावित्री भी अमर उजाला कार्यालय पहुंची।
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