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मुसीबत की बाढ़: बच्चों को नहीं मिल पा रहा दूध, सब्जी समेत जरूरी सामान की भी किल्लत; ऐसे हैं हालात

Tue, 17 Sep 2024 04:02 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर खीरी
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घर में भरा पानी, चारपाई पर खाना बनाती महिला - फोटो : अमर उजाला
लखीमपुर खीरी जिले में पलिया, बिजुआ, निघासन, धौरहरा और फूलबेहड़ इलाकों में बाढ़ से 250 गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। घरों में पानी भरा है। बाढ़ पीड़ित छत, सड़कों और अन्य ऊंचे स्थानों पर पनाह लिए हैं। प्रशासन की ओर से खाने के पैकेट तो पहुंचाए जा रहे हैं, लेकिन बच्चों को दूध और अन्य आवश्यक वस्तुएं नहीं मिल पा रही हैं। सब्जियां और अन्य जरूरी सामान के लिए लोग परेशान हैं। सूखा स्थान न होने से चारपाई पर ही ईंट रखकर खाना बनाने को विवश हैं। शारदा नदी की बाढ़ का पानी निघासन क्षेत्र के करीब 100 गांवों में भर गया है। पलिया-निघासन स्टेट हाईवे के दक्षिण तरफ बल्लीपुर से बंधा पर स्थित बंगाली कॉलोनी तक लगभग 42 किलोमीटर तक के सारे गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ पीड़ितों की पूरी फसल नष्ट हो गई है। आवागमन में भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 
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लखीमपुर खीरी में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला
पतिया ग्राम पंचायत के गांव भानपुरवा में तहसीलदार भीमचंद ने 200 लंच पैकेट, लेखपाल श्याम किशोर ने भदुरैहिया गदियाना में 150 और प्रधान इकराम अली ने पतिया गांव पश्चिम मोहल्ले में 50 लंच पैकेट वितरित किए। बल्लीपुर ग्राम पंचायत के गांव गोतेबाजपुरवा की स्थिति काफी दयनीय है। 25 से अधिक घरों के लोग आज भी छतों और चारपाई पर खाना बनाने को विवश है। 
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पलिया-भीरा मार्ग पर अतरिया के आगे पुलिया काटकर बहता पानी। संवाद
गांव से आने-जाने का मुख्य मार्ग बाधित है। ग्रामीणों को दैनिक उपयोग की वस्तुएं नहीं मिल पा रही हैं। प्रशासन ने अब तक गोतेबाजपुरवा में कोई भी राहत सामग्री नहीं पहुंचाई है। गोतेबाज पुरवा के अफसर अली, पेशकार, जमील और जाबिर आदि ने बताया कि गांव में तीन दिन से पानी भरा है, लेकिन प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की है। एसडीएम राजीव निगम ने बताया कि भोजन के पैकेट की व्यवस्था की जाएगी। 

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बाढ़ के पानी से घिरा घर - फोटो : अमर उजाला
तिकुनिया इलाके में घरों में मोहाना नदी की बाढ़ का पानी भर जाने से कई गांवों के ग्रामीण सड़कों पर तंबू तानकर रह रहे हैं। गुरुद्वारे के निकट सड़क पर प्लास्टिक तंबू तानकर रह रहे बेचेलाल, पन्ना, शत्रोहन, नंदी, सुबरन लाल, जनकपुर की गुड्डी, बसंती, रामकली, राम सिंह, झब्बू, सुनीता, बेचन शर्मा, संदीप सुवाली, गौतम घनश्याम, गोविंदा, लवकुश, पन्नालाल, सतीश और विमलेश ने बताया कि इस बार इतनी तेजी से पानी घरों में घुसा कि वे लोग जान बचाकर किसी तरह बच्चों को लेकर भागे। राशन और खाने पीने की सामग्री घरों में छूट गई। अब तहसील प्रशासन के भरोसे हैं। लेखपाल ने गुरुद्वारे में खाना खाने की बात कही है। एसडीएम राजेश निगम ने बताया कि घरों से पानी निकल जाने के बाद सर्वे कराकर बाढ़ पीड़ितों की मदद की जाएगी। 

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बच्चे को कंधे पर बिठाकर ले जाता ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
तीन दिनों से भरा है 20 गांवों में बाढ़ का पानी
धौरहरा तहसील क्षेत्र के ओझापुरवा, कैरातीपुरवा, डुडकी, रुद्रपुर, गोतेबाजपुरवा, बिंजहा, बंशीबेली, बनटुकरा, मांझासुमाली, समदहा, गौढ़ी मिलिक, सधुवापुर बेतीसहदेव रामलोक, गनापुर, दुर्गापुर पड़री, डाबर, जंगलमटेरा सहित करीब 20 गांवों में तीन दिनों से पानी भरा है। राहत की बात यह है कि पानी घटना शुरू हो चुका है। लोग बैलगाड़ी, ट्रॉली और चारपाई पर जिंदगी गुजार रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिली है। एसडीएम राजेश कुमार ने बताया कि बाढ़ प्रभावित बिंजहा, परसा, मांझासुमाली, गनापुर, डुड़की, चकदहा सधुवापुर में लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। बाढ़ राहत किट शाम तक वितरित कराई जाएगी। 
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नाव पर शव रख तीन किलोमीटर किया सफर - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन ने दिया हरसंभव मदद का भरोसा
रविवार को बसहा में बुजुर्ग राम स्वरूप की बीमारी से मौत हुई थी। रविवार को परिजनों को शव नाव पर रख तीन किलोमीटर दूर तटबंध पर ले जाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। बाढ़ की बेबसी के बीच इस मार्मिक दृश्य को देख सभी की आंखें नम हो गई थीं। सोमवार को खबर छपने के बाद सदर तहसील के नायब तहसीलदार अश्वनी कुमार लेखपाल के साथ मृतक के रिश्तेदार के घर पहुंचे। नायब तहसीलदार अश्वनी कुमार ने बताया कि बाढ़ से लोगों को दिक्कत हुई है। बसहा में मृत शरीर को नाव पर ले जाए जाने की जानकारी मिली थी। मृतक बुजुर्ग रामस्वरूप के परिजनों को ढांढस बंधाया गया है। मृतक मूलतः खीरी के मुड़ाधामू गांव के निवासी और अविवाहित थे। सर्वे कराकर परिजनों की हर संभव मदद की जाएगी। 

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