मामले की जानकारी देते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
उल्लेखनीय है कि कोताना गांव में एक साथ कब्रिस्तान से शवों के सिर गायब होने का मामला उजागर हुआ है। इसको लेकर लोग दहशत में हैं, क्योंकि दीपावली व होली वैसे तो सुख-समृद्धि के त्योहार के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस दिन का तांत्रिकों के लिए भी खास महत्व है।
ग्रामीणों की पुलिस से तीखी नोकझोंक।
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, दूसरे पहलू को देखा जाए तो जंगलों या कब्रिस्तान के आसपास रहने वाला जीव कबर बिज्जू भी कब्रों में घुसकर इंसानी शवों को खा जाता है। यह अपने पुष्ट नखों से कब्र खोदकर मुर्दा खा लेता है। बिज्जू आलसी होता है और मंद गति से चलता है। यह सर्वभक्षी है।
कब्रिस्तान के आसपास रहने वाले लोगों को संताने लगी बच्चों की चिंता
गांव के दो कब्रिस्तानों से एक साथ नौ शवों को खुदबुर्द कर अधिकांश शवों के सिर गायब होने की घटना के बाद अब कब्रिस्तान के आसपास रहने वाले लोगों को अपने बच्चों की चिंता सताने लगी है, क्योंकि जहां तांत्रिक तंत्र विद्या के चलते उनके बच्चों को नुकसान पहुंचा सकता है, वहीं कबर बिज्जू नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों को अपना निशाना बना सकता है। आदमखोर होना इस जीव की प्रवृत्ति में शामिल है, इसलिए इसका खतरा अधिक बताया जा रहा है।
दहशत में इलाके के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
झलका ग्रामीणों का दर्द
पुलिस प्रशासन को पहले ही सूचना दे दी गई थी, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। यदि पुलिस मामले को गंभीरता से ले लेती तो शवों के साथ ऐसी घटना न होती। - सलीम
यह कबर बिज्जू का काम बिल्कुल नहीं है, क्योंकि अधिकांश शवों के सिर गायब हैं और कब्रो को पैरों की ओर से फावड़े से खोदा गया है। ऐसा काम केवल तांत्रिक ही कर सकता है। -महीनू
घटना को लेकर लोग दहशत में है, जिन लोगों के मुर्दों के शवों के साथ ऐसी बर्बरता हुई है, उनमें रोष भी है। क्योंकि उक्त लोगों की मौत के बाद लोग सदमे से थोड़ा बाहर आए थे, लेकिन अब शवों के साथ ऐसी घटना होने से लोग काफी आहत है। पुलिस प्रशासन को इसमें सतर्कता बरतनी चाहिए। - पूर्व प्रधान रईस
ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया।
- फोटो : अमर उजाला
ये बोले वन क्षेत्राधिकारी
कबर बिज्जू नामक यह जीव नेवले की तरह दिखाई देता है और यह बेहद ही खतरनाक होता है। इसका प्रमुख भोजन फल, कंदमूल और छोटे कीट पतंगे भी होते हैं। कबर बिज्जू को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत एक संरक्षित प्राणी माना गया है। इसको नुकसान पहुंचाने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। यह जीव निशाचर होता है, इसलिए लोग इससे बचाव के लिए रात के समय अधिक अलर्ट रहते हैं।
- सुनेंद्र सिंह वन क्षेत्राधिकारी बड़ौत