अमरोहा के कई गांवों में तेंदुए की मौजूदगी और हमलों ने ग्रामीणों में दशहत पैदा कर दिया है। वन विभाग की पंजों की तलाश और पिंजरे लगाने की कोशिशें उपयोगी साबित नहीं हो रही। इसी का नतीजा है कि कुतुबपुर हमीदपुर गांव में खेतों में अचानक हमला करने के बाद भीड़ ने तेंदुए को घेरकर लाठी-डंडों से मार डाला था।
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नाैगांवा सादात में तेंदुए के हमले के बाद नाराज ग्रामीण
- फोटो : संवाद
कभी तेंदुए की आहट तो कभी आबादी तक आमद, कभी गुर्राहट तो कभी हमला... इस तरह के अनुभव अमरोहा जिले के कई गांवों के लोगों की नियति बन चुके हैं। इन घटनाओं से जन्म लेने वाला डर देखते-देखते सामूहिक दहशत बन गया। वन विभाग की तरफ से कभी खेतों में पंजों की तलाश तो कभी जल्द पकड़ लेने के दावे होते रहे। पिंजरे लगे तो वह भी खाली रह जाते। नतीजे में ग्रामीण घबराहट के बीच जीने को मजबूर हो गए। शनिवार को तेंदुआ हमलावर हुआ तो भीड़ हिंसक बन बैठी।
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Amroha Leopard Attack
- फोटो : वीडियो ग्रैब
खुद ही पंच बनकर इस हद तक बेजुबान को पीटा की वह दम तोड़ गया। तेंदुआ भले ही वन्य जीवों की संरक्षित सूची में आता है, लेकिन आबादी में तेंदुए की आबादी तेजी से बढ़ने के बाद भी इसके संरक्षण का कोई प्रयास नहीं हो रहा। बिजनौर में अमानगढ़ के जंगल को आधार बनाकर जीव-जंतुओं को महफूज माहौल देने प्रयास हो रहे हैं, मगर अमरोहा अभी इस तरह के इंतजामों से कोसों दूर है। तेंदुआ दिखने पर वन विभाग और पुलिस की तरफ से सिर्फ पंजे के निशान की तलाश और गाहे-बगाहे पिंजरे लगाने की कोशिश भर होती है।
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Amroha Leopard Attack
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एडवाइजरी भी जारी होती है तो इस तरह की जो ग्रामीण जीवन में व्यावहारिक नहीं है। अक्सर सलाह दी जाती है कि ग्रामीण खेतों-जंगलों की तरफ अकेले न जाएं, बच्चों को घर में रखें, रात में निकलने से बचें। इन मश्वरों पर ग्रामीण अमल नहीं कर पाते। खेत-बाग-बागीचों से सीधा रिश्ता होने के कारण ग्रामीणों का वहां तक जाना जरूरी है तो पशुओं को चराने या चारा लाने के लिए भी खेत व नदी के किनारे उनके जीवन का हिस्सा हैं।
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Amroha Leopard Attack
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शनिवार को नौगांवा सादात क्षेत्र के कुतुबपुर हमीदपुर में भी किसान फसलों के लिहाज से खेतों में थे। दिन का उजाला था और अचानक कोविन पर तेंदुए ने हमला कर दिया। भगाने के बजाय ग्रामीणों ने घेरने की कोशिश। डंडाधारी ग्रामीणों के इस तरह के प्रयासों के बीच से निकलने के लिए बेजुबान ने घेराबंदी करने वालों पर भी हमला कर दिया। हमले का जवाब हमले से देने के तेवर में आई भीड़ ने लाठी-डंडे मारकर उसे मौत की नींद सुला दिया।
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हिंसक बनी भीड़ ने अपने बचाव में ठसके से कहा- हम नहीं मारते तो वह हमें मार डालता। हर दूसरे दिन कहीं न कहीं तेंदुआ नजर आता है। शहर और गांव के बीच रात के सफर में बाइक सवारों का अक्सर तेंदुए से सामना हो जाता है। कुछ लोग हमले का शिकार भी हो चुके हैं, लेकिन सरकारी अमला तेंदुए की दहशत से छुटकारा नहीं दिला पा रहा। यही कारण रहा कि अपने बीच तेंदुए को देख लोगों ने आपा खो दिया और संरक्षित जीव के जीवन की चिंता छोड़कर शिकारी बन बैठे।
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सिर और गर्दन की हड्डी टूटने से हुई तेंदुए की मौत
कुतुबपुर हमीदपुर में तेंदुए की मौत लाठी-डंडों की पिटाई से हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए के सिर और गर्दन की हड्डी टूटने की बात सामने आई है। डीएफओ एसपी सिंह ने बताया कि इस तरह की चोट के निशान लाठी डंडे पिटाई से होते हैं। इससे साफ है कि ग्रामीणों की पिटाई के कारण ही तेंदुए की मौत हुई है।
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चार घंटे तेंदुए और ग्रामीणों के बीच हुआ मुकाबला
कुतुबपुर हमीदपुर में करीब चार घंटे तेंदुए और ग्रामीणों के बीच मुकाबला हुआ। कभी तेंदुए ने ग्रामीणों का पीछा किया तो कभी ग्रामीणों ने तेंदुए को दौड़ाया। चारो और तेंदुए का शोर और चीखपुकार मची हुई थी। तेंदुए के हमले के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल बन गया। करीब चार घंटे तक कुतुबपुर हमीदपुर के जंगल में गम, गुस्सा और जुनून का माहौल दिखाई दिया।
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दो घंटे बाद पहुंची वन विभाग की टीम
ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के दो घंटे बाद वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। वह भी खाली हाथ। चारों तरफ तेंदुए का शोर था। ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद भी वन विभाग के कारिंदों के पास न तो तेंदुए को पकड़ने के लिए जाल था, न पिंजरा। लोगों ने तेंदुआ पकड़ने के लिए कहा तो जिम्मेदारों ने थोड़ी देर में पिंजरा पहुंचने का भरोसा दिया। इससे ग्रामीणों का गुस्सा फूटा और तेंदुए पर टूट पड़े।
पेड़ पर चढ़े कृपाल, फिर भी पीछे लगा रहा तेंदुआ
ग्रामीणों ने बताया कि तेंदुए की दहशत से लोग इधर-उधर दौड़ रहे थे। तेंदुए के हमले में घायलों का खून बह रहा था। बार-बार के झपट्टे से लोग जमीन पर गिर रहे थे। बचाव में कृपाल सिंह पेड़ पर चढ़ गए। तेंदुए ने तब भी हमले की कोशिश की। उसका हिंसक रूप देख लोग बचाव में उसे पीटने को मजबूर हो गए।
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चार दिन पहले भी बुलाने पर नहीं पहुंची थी टीम
चार दिन पहले गांव के ही पप्पू सैनी की बकरी को तेंदुए ने निवाला बनाने की कोशिश की थी। इस पर वन विभाग के अधिकारियों को फोन किया था लेकिन कोई नहीं पहुंचा था।
नाैगांवा सादात में तेंदुए के हमले के बाद नाराज ग्रामीण
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ग्रामीणों ने घेरा थाना, पुलिस के छूटे पसीने
तेंदुए की हत्या करने के मामले में तीन लोगों को हिरासत में लेने के बाद कुतुबपुर हमीदपुर के ग्रामीण थाने पहुंच गए। यहां जमकर हंगामा किया। इस दौरान ग्रामीणों ने पुलिस की हिरासत में तीनों लोगों को छुड़ाकर भाग दिया। ग्रामीणों का आक्रोश देखकर पुलिस के पसीने छूट गए। करीब एक घंटे तक थाने पर ग्रामीणों का हंगामा हुआ। हालांकि, बाद में पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों के समझाने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हुआ। सूचना पर विभाग के डिप्टी रेंजर राजीव वर्मा, वन दरोगा केपी सिंह वनरक्षकों के साथ माैके पर पहंुचे।