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यूपीपीएससीः हिंदी का दुरूह अनुवाद बना परीक्षार्थियों के लिए मुसीबत

Tue, 11 Feb 2020 02:52 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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upsc - फोटो : file photo
शालिनी और उनकी टीम ने सर्वे में पाया कि परीक्षा में हिंदी का दुरूह और अव्यवहारिक अनुवाद हिंदी माध्यम के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो रहा है। उदाहरण के तौर पर आंकड़े की जगह दत्त, जनसंख्या की जगह समष्टि, प्लास्टिक की जगह सुघट्य, आधारभूत की जगह अध:शायी आदि लिखा जाना प्रश्न को अनावश्यक रूप से क्लिष्ट बनाता है।
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यूपीएससी परीक्षा पैटर्न में बदलावों का प्रस्ताव - फोटो : अमर उजाला
भ्रामक तथ्य फैलाए जाने का आरोप

अभ्यर्थियों के मुताबिक यह भ्रामक तथ्य फैलाया जार हा है कि वर्ष 2018 में चयनित 812 अभ्यर्थियों में 485 हिंदी भाषी अभ्यर्थी हैं। दरअसल, यह आंकड़ा उन अभ्यर्थियों का है, जिनकी मातृभाषा हिंदी है। हिंदी भाषी कई राज्यों में अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थी की मातृभाषा हिंदी ही होती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अभ्यर्थियों ने दिए इन बदलावों के सुझाव

- प्रारंभिक परीक्षा में ‘आईक्यू’ के साथ ‘ईक्यू’  परखने के लिए भी गुंजाइश हो
- सीसैट के प्रश्नपत्र को तत्काल हटाकर पूर्व पद्धति में प्रारंभिक परीक्षा या केवल सामान्य अध्ययन का पेपर लिया जाए, जिसमें परंपरागत विषयों के प्रश्नों का प्रतिशत अधिक हो
- सिविल सेवा और वन सेवा की प्रारंभिक परीक्षा अलग ली जाए
-  प्रश्नों की प्रकृति सामान्य ज्ञान के अनुकूल हो
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upsc
क्या कहते हैं विशेषज्ञ

‘आईएएस में चयनित हिंदी माध्यम के छात्रों की सख्या तेजी से कम होने के कई कारण है। पैटर्न, पेपर सेटिंग, मूल्यांकन में लगतार हो रहा बदलाव हिंदी माध्यम छात्रों के अनुकूल नहीं रह गया है। वहीं, हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए बाजार में पर्याप्त पाठ्य सामग्री भी उपलब्ध नहीं है। सात-आठ साल पहले प्राचीन इतिहास, दर्शनशास्त्र से कई प्रश्न पूछे जाते थे लेकिन अब भूगोल, राजनीति विज्ञान जैसे विषयों से ज्यादा सवाल आने लगे हैं और इन विषयों की तैयारी के लिए ज्यादातर पाठ्य सामग्री अंग्रेजी भाषा की पुस्तकों में मिलती है।’ प्रो. मनमोहन कृष्ण, अर्थशास्त्र विभाग, इविवि

‘हिंदी माध्यम छात्रों के चयन में तेजी से गिरते ग्राफ के कई कारण है। पैटर्न में बदलाव और सीसैट को लागू किया आंशिक कारण हो सकता है लेकिन इन्हें पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हिंदी माध्यम के छात्रों को लगातार हो रहे बदलावों के अनुरूप खुद को ढालना होगा। हालांकि छात्र लगातार सवाल उठा रहे हैं कि अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को अधिक और हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को कम अंक दिए जाते हैं। यह गंभीर मसला है और ऐसे में आयोग को अपनी मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता लाने की जरूरत है।’ दीपक सिंह, डायरेक्ट, कॅरियर वर्ल्ड कोचिंग संस्थान
 
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