शालिनी और उनकी टीम ने सर्वे में पाया कि परीक्षा में हिंदी का दुरूह और अव्यवहारिक अनुवाद हिंदी माध्यम के लिए अत्यंत घातक सिद्ध हो रहा है। उदाहरण के तौर पर आंकड़े की जगह दत्त, जनसंख्या की जगह समष्टि, प्लास्टिक की जगह सुघट्य, आधारभूत की जगह अध:शायी आदि लिखा जाना प्रश्न को अनावश्यक रूप से क्लिष्ट बनाता है।