राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
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चेजनी ने उनकी बातें सुनने के बाद भरोसा दिलाया, ‘आप जो कुछ भी लिखेंगे, मैं उस पर तुरंत टिप्पणी करूंगा।’ इसके बाद गांधी जी संगम स्नान और शहर घूमने के लिए भी गए। प्रवास के दौरान ही उन्होंने ‘ग्रीन पंफलेट’ की रचना का संकल्प लिया। लेकिन इसके बाद वह जब भी आए, हर बार आनंद भवन में ही ठहरे। उनके लिए आनंद भवन में एक अलग कमरा ही था। इलाहाबाद आने पर वह उसी कमरे में ठहरते थे। इस कमरे में आज भी उनके चित्रों के अतिरिक्त उनकी ओर से प्रयोग की गई पलंग, कुर्सी, मेज, कपड़े, पूजा के बर्तन, सूत और चरखा तो सुरक्षित है ही, कमरे में तीन बंदरों की मूर्तियां भी हैं।