एक तरह जहां सरकारी डॉक्टर कोरोना योद्धा बने हैं, वहीं दूसरी तरफ मोहल्लों में क्लीनिक खोलकर बैठे निजी चिकित्सकों ने इमरजेंसी के नाम पर अपनी फीस लगभग दोगुनी कर दी है। लॉकडाउन के चलते निर्धारित समय पर क्लीनिक खुलती नहीं, इस दौरान कोई मरीज आया तो उससे इमरजेंसी के नाम पर कम से कम एक हजार रुपये वसूले जाने की शिकायतें पीड़ितों ने की हैं।
निजी चिकित्सकों का अधिक फीस वसली का यह फंडा मरीजों पर भारी पड़ रहा है। शहर के हर मोहल्लों में नामचीन डॉक्टरों के क्लीनिक हैं। आमतौर पर निजी डॉक्टरों की फीस पांच से छह सौ रुपये (सात दिन के लिए वैध) लिए जाते हैं। दरियाबाद के रहने वाले रहमान अली ने बताया कि वह नियमित तौर पर इलाज कराने जाते हैं।