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इमरजेंसी के नाम पर निजी चिकित्सकों ने बढ़ाई फीस, कई बड़े डॉक्टरों ने फीस कर दी दोगुनी

Mon, 06 Apr 2020 11:39 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
एक तरह जहां सरकारी डॉक्टर कोरोना योद्धा बने हैं, वहीं दूसरी तरफ मोहल्लों में क्लीनिक खोलकर बैठे निजी चिकित्सकों ने इमरजेंसी के नाम पर अपनी फीस लगभग दोगुनी कर दी है। लॉकडाउन के चलते निर्धारित समय पर क्लीनिक खुलती नहीं, इस दौरान कोई मरीज आया तो उससे इमरजेंसी के नाम पर कम से कम एक हजार रुपये वसूले जाने की शिकायतें पीड़ितों ने की हैं। 

निजी चिकित्सकों का अधिक फीस वसली का यह फंडा मरीजों पर भारी पड़ रहा है। शहर के हर मोहल्लों में नामचीन डॉक्टरों के क्लीनिक हैं। आमतौर पर निजी डॉक्टरों की फीस पांच से छह सौ रुपये (सात दिन के लिए वैध) लिए जाते हैं। दरियाबाद के रहने वाले रहमान अली ने बताया कि वह नियमित तौर पर इलाज कराने जाते हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दो दिन पहले दिक्कत बढ़ी तो डॉक्टर के यहां पहुंचे। वहां गेट बंद था। गार्ड ने बताया कि क्लीनिक बंद है। दिखाना है तो इमरजेंसी फीस 1000 रुपये लगेगी। यह सुनते ही रहमान के होश उड़ गए। वह बच्चे के साथ घर गए। कुछ रुपये और लाए तब एक घंटे बाद डॉक्टर ने उनको देखा। 

इसी तरह हिम्मतगंज की शालिनी सिंह बच्चे को बुखार आने से परेशान थीं। पास स्थित एक डॉक्टर की क्लीनिक पर पहुंची तो उनसे भी इमरजेंसी फीस के तौर पर 800 रुपये लिए गए। यह मामले तो बानगी भर हैं, पर लॉक डाउन के समय सेवा के बजाय फीस के नाम पर दोगुनी वसूली मरीजों को ही नहीं तीमारदारों को अखर रही है। लोगों ने बताया कि निजी अस्पतालों में भी उन्हीं मरीजों को देखा जा रहा है जिनका पहले पर्चा बन चुका है। गंभीर रोगियों को सरकारी अस्पताल ले जाने की सलाह दी जा रही है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
शहर के कई और डॉक्टर हैं जो इन दिनों मरीजों की संख्या कम होने पर अधिक फीस ले रहे हैं। उनका कहना है कि इस स्थिति को इमरजेंसी नहीं तो और क्या कहेंगे। वहीं कई चिकित्सकों ने लॉक डाउन के दौरान मरीजों से फीस न लेने का भी दावा किया। उनके मुताबिक इस मजबूरी में जो उनके पास तक आया है, उसे निराश नहीं करना है। बिना फीस देखने का काम लॉक डाउन तक जारी रहेगा।  
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