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हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्म प्रयागराज के किस मुहल्ले में हुआ इसको लेकर भी है असमंजस, घर कौन है यह तो दूर की कौड़ी

Sun, 29 Aug 2021 07:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में हुआ था। उनके पिता समेश्वर दत्त सिंह सेना में कलर्क थे। मेजर ध्यानचंद के जन्म के करीब छह-सात वर्ष उनके पिता का तबादला झांसी हो गया। इसके बाद वह झांसी चले गए।
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मेजर ध्यानचंद - फोटो : Sportskeeda.com
हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद का जन्म प्रयागराज में हुआ यह गौरव की बात है, लेकिन जन्मस्थान कौन सा मोहल्ला है यह आज भी स्पष्ट नहीं है। यही कारण है कि संगम नगरी विश्व प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ी के नाम की स्मृतियां भी नहीं संजो सका। उनके जन्मस्थान को लेकर प्रयागराज में भी मुख्यत: दो मोहल्लों के नाम चर्चा में रहते हैं। पहला मोहल्ला मुट्ठीगंज और दूसरा ओल्ड कैंट।  

मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में हुआ था। उनके पिता समेश्वर दत्त सिंह सेना में कलर्क थे। मेजर ध्यानचंद के जन्म के करीब छह-सात वर्ष उनके पिता का तबादला झांसी हो गया। इसके बाद वह झांसी चले गए। उनकी शिक्षा-दीक्षा के साथ ही खेल का अधिकतर समय झांसी में ही गुजरा। मेजर ध्यानचंद के जन्म स्थान को लेकर इसी कारण कुछ स्पष्ट नहीं है। उनके परिवार से जुडे़ रहे कई हॉकी खिलाड़ी भी जन्मस्थान को लेकर स्पष्ट नहीं हैं। 
 
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मेजर ध्यानचंद - फोटो : Sportskeeda.com
पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी श्यामबाबू गुप्ता बताते हैं कि वह मध्य भारत और इंडियन ऑडिट टीम से खेलते थे। मेजर ध्यानचंद के भाई रूप सिंह उनकी टीम के कोच थे। ग्वालियर से कई बार उनके घर झांसी भी जाना होता था। उनके जन्मस्थान के बारे में चर्चा है कि वह मुट्ठीगंज मोहल्ले में जन्मे थे। यहां किसी मंदिर के पास ही उनके पिता रहते थे। जबकि हॉकी खिलाड़ी रहे शाहिद कमाल खान बताते हैं कि कई पुराने खिलाड़ियों से जानकारी करने पर पता चला कि उनके पिता सेना में थे और ओल्ड कैंट मोहल्ले में ही उनका जन्म हुआ था।  
 
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मेजर ध्यानचंद
आजादी से पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में खेलने आए थे प्रदर्शनी मैच

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद आजादी से पहले इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रदर्शनी मैच खेलने आए थे। उस समय इलाहाबाद में हॉकी का स्तर काफी ऊंचा था। यहां की टीम काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी श्यामबाबू गुप्ता बताते हैं कि तब वह बहुत छोटे थे। मनमोहन पार्क के समीप रहने वाले उनके परिचित दिन्नू साहब उन दिनों इलाहाबाद विश्वविद्यालय की टीम के गोलकीपर हुआ करते थे। विश्विद्यालय में मेजर ध्यान चंद दद्दा के प्रदर्शनी मैच के बारे में दिन्नू साहब के पास कई स्मृतियां थीं।
 
दद्दा झांसी हीरोज की टीम से खेलते थे। कलकत्ता भी उन दिनों हॉकी का केंद्र होता था। आजादी के पहले एक बार मेजर ध्यान चंद कलकत्ता हॉकी मैच खेलने के जा रहे थे। चूकि कलकत्ता प्रयागराज के रास्ते होकर जाना पड़ता था, इसलिए दद्दा का एक प्रदर्शनी मैच प्रयागराज में रखा गया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय मैदान पर खेले गए मैच में विवि की टीम से दुन्नी साहब गतौर गोलकीपर खेले। प्रदर्शनी मैच में दुन्नी साहब ने शानदार प्रदर्शन किया। उनके प्रदर्शन से दद्दा इतने खुश हुए कि दुन्नी साहब को गोद में उठा लिया।  

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DHYAN CHAND - फोटो : self
लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में तीन बार किया था विजिट 
मेजर ध्यानचंद दद्दा ने लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में तीन बार विजिट किया था। 1977 में सरकार ने लखनऊ के केडी सिंह बाबू स्टेडियम में महिला हॉस्टल की स्थापना की। 
यहां केडी सिंह बाबू को निदेशक नियुक्त किया गया था। चूंकि दद्दा और केडी सिंह बाबू एक दूसरे के साथ खेले थे, इसलिए वह लखनऊ तीन बार विजिट पर आए। पूर्व इंटरनेशनल हॉकी खिलाड़ी पुष्पा श्रीवास्तव बताती हैं कि 1977 में 10 लड़कियां हास्टल में प्रशिक्षण ले रहीं थीं।

यहां 1977 से 1978 के बीच दद्दा तीन बार आए। 1978 में केडी सिंह बाबू और 1979 में दद्दा का निधन हो गया था। उस समय हास्टल में हॉकी की कोच दुला गांगुली थीं। मेजर ध्यानचंद ने कोच दुला गांगुली के साथ सभी को हॉकी के टिप्स दिए। दद्दा ने कोच से कहा कि वह खिलाड़ियों को बिग बाल से प्रैटिक्स कराएं। पुष्पा श्रीवास्तव बतातीं हैं कि दुला गांगुली और केडी सिंह बाबू दद्दा के बारे में हमेशा चर्चा करते थे। वह बताते थे कि दद्दा नंगे पैर ही मैदान पर उतरते थे। जब वह गुस्से में होते थे और अधिक गोल करते थे। 
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Dhyan Chand Award - फोटो : social Media
जब कोचिंग कैंप में दद्दा का कॉर्नर हिट नहीं रोक पाए गोलकीपर
मेजर ध्यानचंद रिटायर्ड होने के बाद भी भारतीय हॉकी टीम के खेल पर पैनी नजर रखते थे। वर्ष 1966 में उनको भारतीय टीम के कोचिंग कैप में भारतीय टीम की प्रशिक्षण देने के लिए बुलाए गया। इस कैंप में प्रयागराज के रहने वाले राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रामबाबू गुप्ता भी थे। रामबाबू गुप्ता बताते हैं कि उस समय भारतीय टीम शॉट कार्नर में कमजोर थी। दद्दा इस बात से खासे नाराज हुए। उन्होंने भारतीय टीम के गोलकीपर लक्ष्मण को कहा कि टीम शॉट कार्नर को गोल में बदलने में कमजोर है। उन्होंने गोलकीपर लक्ष्मण से कहा कि वह 20 शॉट मारेंगे और सभी को गोल में तब्दील करेंगे। भारतीय टीम के लक्ष्मण गोल पोस्ट में तैनात हो गए। दद्दा ने 12 शॉट मारे और सभी गोल में तब्दील हो गए। इसके बाद गोलकीपर लक्ष्मण गोल पोस्ट से हट गए।

जब ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता टीम को हराया था
मेजर ध्यानचंद ने 1948 की ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता टीम को हराया दिया था। पूर्व राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी श्याम बाबू गुप्ता बताते हैं कि 1948 में भारतीय टीम ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतकर लौटी थी। टीम के सम्मान में झांसी हीरोज और ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता टीम का एक प्रदर्शनी मैच रखा गया। उस समय मेजर ध्यानचंद खेलों से सन्यास ले चुके थे। प्रदर्शनी मैच वह झांसी हीरोज की टीम से खेलने उतरे। इस मैच में दद्दा की टीम ने ओलंपिक गोल्ड मेडल विजेता टीम को दो गोल से हरा दिया। इस मैच में मेजर ध्यानचंद ने दोनों गोल दागे थे। 



  

   
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