माघ मेले के तीसरे सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर मौन डुबकी मंगलवार को लगी, लेकिन इससे पहले ही संगम पर आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। सोमवार को संगम समेत पांच सेक्टरों में बने स्नान घाटों पर कहीं तिल रखने की जगह नहीं बची। कल रात 12 बजे से आज शाम चार बजे तक लगभग 95 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया। कुल का मिलाकर आज मंगलवार शाम चार बजे तक लगभग एक करोड़ 45 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
संगम जाने वाली सड़कों से लेकर पांटून पुलों तक श्रद्धालुओं सिर्फ श्रद्धालुओं का कारवां चलता रहा। सिर पर गठरी, झोला लिए लोग से मौन डुबकी के संकल्पों को पूरा करने के लिए बढ़ते रहे। संगम समेत गंगा के नौ घाटों पर इस बार डुबकी लगेगी। कोरोना संक्रमण से सतर्कता के लिए मेले के प्रवेश द्वारों समेत 22 स्थानों पर टेस्टिंग और स्क्रीनिंग सेंटर बनाए गए हैं।
सोमवार की देर शाम तक पांच सेक्टर में बसे संतों, तीर्थपुरोहितों के शिविरों में लाखों श्रद्धालुओं ने डेरा डाल दिया। इस दिन अमावस्या लगने की वजह से संगम क्षेत्र से जुड़े राजमार्गों के अलावा रेती पर बसे शिविरों से एक दिन पहले ही आस्थावानों का रेला मौन डुबकी के लिए उमड़ने लगा। सुबह घने कोहरे के बीच भक्ति की लहरें हिलोरें मारने लगीं। लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा-यमुना और अदृश्य संगम में डुबकी लगाई।
चाहे काली मार्ग हो या लाल मार्ग या फिर अक्षयवट और त्रिवेणी मार्ग, संगम जाने वाली हर सड़क श्रद्धालुओं से पैक हो गई। भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई।
पांच सेक्टर में बसे मेले में छह ऐसे स्थानों पर वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है, जहां से संगम जाने के लिए कम चलना पड़े। सुरक्षा के लिए स्नान घाटों के अलावा मेला क्षेत्र में सेक्टर वाइड आतंकवाद निरोधी दस्ता समेत पांच हजार से अधिक जवान तैनात कर दिए गए हैं।