चंद क्षणें का आक्रोश कई की जिंदगी तबाह कर गया। विवाद का दोषी कोई भी रहा हो, लेकिन एक ही परिवार के दोनों सगे भाइयों की मौत के बाद देवरानी, जेठानी की मांग का सिंदूर उजड़ गया। दोनों के आठ बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। चोटिल मां की आंखों में अपने कलेजे के टुकड़ों को खोने का दर्द छलक रहा है। राजवीर और कैलाश की पत्नियां बेसुध हैं।
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दो भाइयों की मौत के बाद गमजदां परिवार
- फोटो : अमर उजाला
नगला माधव की घटना दर्दनाक और हृदय विदारक है। राजवीर की पत्नी लता है और उसके चार बच्चे हैं। सबसे बड़ा बेटा आकाश (10), प्रशांत (6), रितिक (4) व बेटी विमलेश (9) हैं। पिता के जीवन से इन बच्चों के भविष्य की कई उम्मीदें जुड़ी हुईं थी, जो एक पल में ही चकनाचूर हो गईं।
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ग्रामीणों से पूछताछ करती पुलिस
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वहीं कैलाश की पत्नी सोमवती है और उसके भी बच्चे हैं। बड़ा बेटा अंशुल (5), नितिन (4), मानव (2) और कुलदीप (15 दिन) है। इन बच्चों ने अभी होश भी नहीं संभाला है, लेकिन आक्रोश की गोली ने इस परिवार की खुशियां छीन लीं। लता और सोमवती की मांग का सिंदूर एक ही दिन में उजड़ गया और उनके आठों बच्चों के सिर से रातों रात पिता का साया उठ गया।
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मृतकों की मां लौंगश्री
- फोटो : अमर उजाला
सबसे बड़ा दर्द यहां उस वृद्ध बेबस मां की आंखों में देखने को मिला जो इस विवाद में पिटाई से घायल है। दो बेटों की मौत के बाद वह पूरी तरह टूट चुकी है। कभी वह दर्द से चीखती है, तो कभी उसकी आंखों से आंसू टपकने लगते हैं। हर कोई इस घटना से द्रवित नजर आ रहा है।
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घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
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15 दिन का बेटा कुलदीप अभी अपने पिता कैलाश की सूरत पहचान भी नहीं पाया। अभी ठीक से वह आंखें भी नहीं खोल पाया है, तब तक इस संघर्ष में उसका पिता छिन गया। बेटे को गोद में लिए बिलखती मां को देखकर हर किसी आंख नम हो गईं।
मां लौंगश्री और बहन फूलवती कैलाश के पास रहते थे। फूलवती अविवाहित है। भाई कैलाश अपनी बहन के लिए वर की तलाश कर रहा था, लेकिन बहन के हाथ पीले करने से पहले ही भाई की अर्थी उठ गई।