आगरा में प्रशासन की सख्ती और जागरूकता अभियान के बाद अभी भी कई लोग बाइक या स्कूटर चलाते वक्त हेलमेट नहीं पहनते हैं। इसके विपरीत ताजनगरी में एक जगह ऐसी भी है, जहां लोग अनुशासन की मिसाल पेश कर रहे हैं। यहां पैदल चलने वाले, खेतों में काम करने वाले हेलमेट लगाए नजर आ रहे हैं। इन्हें देखकर लोग भले ही अचरज करें, लेकिन ये लोग सुरक्षा का अनूठा संदेश दे रहे हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट....
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के दयालबाग में वसंत पंचमी के दौरान आयोजित सत्संग में लोगों को हेलमेट पहनने का संदेश दिया गया। लोगों ने इसे गंभीरता से लिया। माता-पिता अपने बच्चों को हेलमेट लगाकर स्कूल भेज रहे हैं।
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दयालबाग में हेलमेट लगाए बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
घर के बाहर साइकिल चलाते या खेलते समय भी बच्चों को हेलमेट लगाए देखा जा सकता है। विद्यार्थी भी कॉलेज में, साइकिल पर या पैदल चलने के दौरान हेलमेट और मॉस्क लगा रहे हैं। इसके अलावा बुजुर्ग सत्संग में हेलमेट लगाकर पहुंच रहे हैं।
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हेलमेट लगाकर काम करते सत्संगी
- फोटो : अमर उजाला
लोगों का कहना है कि सत्संग में गुरु महाराज ने कहा था कि हेलमेट को शरीर का अभिन्न अंग मानें। घर से बाहर निकलते समय हेलमेट जरूर पहनें। यहां गुरु महाराज को मालिक कहा जाता है। लोगों का यह भी मानना है कि सर्दी लगने से जुकाम होता है। ऐसे में हेलमेट लगाने से सिर ढक जाता है। इसलिए उन्हें हेलमेट लगाना चाहिए। कुछ लोगों को हेलमेट के साथ मास्क लगाए भी देखा जा सकता है।
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हेलमेट लगाए महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
दयालबाग की डॉ कविता रायजादा ने बताया कि गुरु महाराज की आज्ञा से सभी हेलमेट लगा रहे हैं। इससे न केवल सड़क दुर्घटना के दौरान सुरक्षा रहेगी, बल्कि दूसरे लोगों को भी वाहन चलाते समय हेलमेट लगाने की प्रेरणा मिलेगी।
श्वेता वत्स ने कहा कि मालिक का आदेश हुआ था। कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है, इसलिए हेलमेट जरूर लगाएं। मैं स्कूल में टोपी पहनकर जाती थी, लेकिन अब हेलमेट लगाकर जा रही हूं। बच्चे भी बड़ी संख्या में हेलमेट लगाकर आ रहे हैं।
इंदौर की रहने वाली अर्चना मालवीय ने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से यह बेहद अनोखी पहल है। मैं सत्संग में भाग लेने के लिए आगरा आई थी, तब सभी को हेलमेट लगाए देखा। अब इंदौर लौटने के बाद भी हेलमेट लगा रही हूं।