जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने मोदी की सुनामी में भी मैनपुरी का किला बचा लिया। मुलायम ने कुल पांचवी और लगातार चौथी जीत दर्ज की। हालांकि जीत के चौके में 2014 के मुकाबले वोटों का अंतर कम रहा।
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मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव
- फोटो : पीटीआई
सपा कार्यकर्ता इस बार सबसे बड़ी जीत होने की उम्मीद लगाए थे। कारण था बसपा से गठबंधन। 24 साल बाद माया और मुलायम एक मंच पर आए थे। 19 अप्रैल को ऐतिहासिक रैली हुई थी। जीत का अंतर कम होने से सपाई थोड़े मायूस हैं लेकिन बदायूं में धर्मेन्द्र यादव, फिरोजाबाद में अक्षय यादव और कन्नौज में डिंपल यादव की हार को देखते हुए मुलायम की जीत को बड़ा माना जा रहा है।
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मुलायम सिंह यादव
- फोटो : अमर उजाला
मैनपुरी लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी का वर्ष 1996 से कब्जा चला आ रहा है। वर्ष 1996 में पहली बार मैनपुरी लोकसभा सीट से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने चुनाव लड़ा और 52 हजार वोट से जीत हासिल की। इसके बाद उनकी जीत का आंकड़ा बढ़ता चला गया।
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मुलायम सिंह यादव
- फोटो : amar ujala
वर्ष 2019 के चुनाव में जीत के आंकड़े में गिरावट आई है। सपा-बसपा के बीच गठबंधन होने से पार्टी नेता और कार्यकर्ता सपा संरक्षक की जीत पांच लाख वोटों के आसपास होने का दावा कर रहे थे। खुद मंच से पार्टी नेताओं ने एलान किया था कि मुलायम सिंह को यहां से ऐतिहासिक जीत मिलेगी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका।