आगरा में थाना कोतवाली के मोहल्ला कूंचा साधूराम में रेखा और उनके तीन बच्चों की हत्या की साजिश संतोष ने एक महीने पहले ही रच ली थी। इसके लिए रेखा के घर आकर सात बार रेकी भी की थी। रेखा के घर से ही कत्ल के लिए चाकू और कैंची को उठाने और आने-जाने वाले रास्ते को देखा था। पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार किए संतोष और उसके साथी वीरू को जेल भेज दिया। आरोपी अंशुल की गिरफ्तारी के लिए टीम दबिश दे रही है। बता दें कि कूंचा साधूराम मोहल्ले में रहने वाली रेखा राठौर (35), उनके बेटे वंश उर्फ टुकटुक (12), पारस (10) और माही (8) की 21 जुलाई को गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद घर में लूटपाट की गई। पुलिस ने मंगलवार को हत्याकांड का खुलासा किया था।
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मृतका रेखा का फाइल फोटो, हत्यारोपी संतोष और वीरू
- फोटो : अमर उजाला
रेखा के पिता विनोद राठौर की बुआ के बेटे बादाम सिंह के बेटे संतोष और उसके दोस्त वीरू को पकड़ा था। संतोष ने हत्याकांड को दोस्त अंशुल और वीरू के साथ मिलकर अंजाम दिया था। पुलिस ने उनके पास से रेखा का एक मोबाइल, चांदी की पायल और 2700 रुपये बरामद किए थे। उसने रेखा से लिए रुपये नहीं चुकाने और घर में लूट करने के इरादे से वारदात की थी।
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रेखा का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस की पूछताछ में आरोपी संतोष ने बताया कि वह एक महीने से रेखा और उसके बच्चों की हत्या का प्लान बना रहा था। इसके लिए 20 दिन में करीब सात बार उसके घर आया था। इस दौरान यह देखकर जाता था कि कहां से आना है, कहां होकर भागना है। क्योंकि रेखा अनजान व्यक्ति के लिए दरवाजा नहीं खोलती थी, इसलिए अपने दोस्तों को मकान का खरीदार बनाकर ले गया था। कहां पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। यहां पर कैसे निकलना हैं। कहां पर साथियों के साथ निकलना है और कहां पर अगल-अलग जाना है, रेखा के घर में ही रखी कैंची और चाकू उठाना है, यह कहां रखे हैं, यह सब पहले से तय कर लिया था।
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रेखा का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
घर में ही धोये थे खून से सने हाथ
पुलिस ने बताया कि घटना से सात दिन पहले संतोष ने रेखा से मोबाइल पर बात करना बंद कर दिया था। उसके घर भी नहीं आ रहा था।, जिससे किसी को उस पर शक नहीं हो। वह घर आया तो घर से ही चाकू और कैंची उठाए थे। रेखा का शव प्रथम तल पर कमरे में बेड के सहारे पड़ा मिला था, जबकि पारस और माही बेड पर पड़े थे। इसके साथ ही वंश का शव स्टोर में था। चारों के गले पर रेतने का निशान था। इसके साथ ही किसी के गले में चादर तो किसी के गले में दुपट्टा पड़ा हुआ था।
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मृतका रेखा और उसके बच्चों के फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने शवों को देखा तो आशंका जाहिर की गई कि पहले गला दबाया होगा, बाद में गले को रेता। मगर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाने की पुष्टि नहीं हुई। गले रेतने से चारों की मौत हुई थी। पुलिस गले में कपड़े लपेटने की वजह नहीं समझ पा रही थी। संतोष पकड़ा गया तो पुलिस ने इस बारे में पूछताछ की। उसने बताया कि गला रेतने पर खून काफी बहता, इसलिए गले में कपड़े लगा दिए थे, जिससे उनके हाथों और कपड़ों पर कम खून लगे। वहीं हत्या के बाद घर के अंदर ही तीनों ने अपने हाथ धोये थे। इस संबंध में फोरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए हैं।
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मृतका रेखा का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस से बचने के लिए चुना था ईद का दिन
पुलिस की पूछताछ में संतोष और उसके साथी वीरू ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर ईद का दिन चुना था। ईद पर पुलिस की ड्यूटी धर्मस्थलों के पास रहती है। रास्ते में चेकिंग भी कम की जाती है। क्योंकि एक्टिवा पर तीन सवारी आए थे। पुलिस चेकिंग में नहीं पकड़ेगी। ईद पर अगर, पुलिस उनके कपड़ों पर खून के छींटे देख भी लेगी तो उन पर शक नहीं करेगी। पुलिस को लगेगा कि तीनों कुर्बानी देकर आ रहे हैं।
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हत्यारोपी संतोष और वीरू
- फोटो : अमर उजाला
सीसीटीवी कैमरे के फुटेज बनेंगे अहम साक्ष्य
मां और तीन बच्चों की हत्या के खुलासे पर एसएसपी के साथ ही आईजी और एडीजी की नजर थी। हत्याकांड की जांच में पुलिस को पहले ही दिन पता चल गया था कि हत्या 21 जुलाई को दोपहर एक से दो बजे के बीच की गई है, जबकि 22 जुलाई को पुलिस को क्षेत्र के लोगों ने सूचना दी थी। ऐसे में कातिलों के बारे में पता करना मुश्किल हो रहा था। क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज चेक किए गए। इसमें कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक सुभाष चंद्र पांडेय के साथ टीम लगी थी। पुलिस ने धूलियागंज से बेगम डयोढ़ी की तरफ आने वाले रास्ते के कैमरे देखे। इसमें 21 जुलाई की दोपहर 12:30 बजे संतोष अपने दोनों साथियों के साथ जाता नजर आया। वहीं तकरीबन साढ़े चार बजे संतोष बैग लटकाए जाता हुआ नजर आया। इसमें बाकी दो एक साथ निकले। संतोष अलग था। इस फुटेज से पुलिस को सुराग मिल गया। इससे उस पर शक गहराया।
अंशुल की तलाश में दबिश
पुलिस ने संतोष के पड़ोसी दोस्त अंशुल की तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी है। वह भी हत्याकांड में शामिल था। उसके रिश्तेदार और परिचितों पर भी शिकंजा कसा गया है। पुलिस को आशंका है कि उसी ने लैपटॉप, टैबलेट सहित अन्य सामान छिपा दिया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद ही यह सामान मिल सकेगा। आरोपी कासगंज, सोरों, कन्नौज, कानपुर होते हुए चित्रकूट भी गए थे। ऐसे में सामान रास्ते में फेंकने की भी उम्मीद है। पुलिस संतोष और वीरू को भी रिमांड पर लेगी जिससे सामान बरामद हो सके।