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एक्सक्लूसिव: दवा तस्करों की दुनिया में पंकज बना ‘पेंट्रा’, प्रमोद ‘बुड्ढा’, मोबाइल से खुले कई राज

Sat, 26 Dec 2020 10:12 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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पुलिस ने गिरफ्तार किए दवाओं के तस्कर - फोटो : अमर उजाला
शातिर दवा तस्कर फोन पर एक दूसरे का नाम लेकर नहीं बल्कि कोड वर्ड में बात करते हैं। सबके अलग-अलग कोड हैं। इनसे ही व्हाट्सएप पर चेटिंग करते हैं। जयपुरिया गैंग से सरगना पंकज गुप्ता का कोड पेंट्रा है। उससे पहले सरगना रहे प्रमोद का कोड बुड्ढा है। पंकज के भाई सूर्यकांत की चैटिंग एसके के नाम से होती है। पुलिस को ये जानकारी तस्करों के मोबाइल की जांच में मिली है। बता दें कि दिल्ली के नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने आगरा पुलिस के साथ कई गोदामों पर छापा मारा था। जहां से करोड़ों रुपयों की दवाइयां बरामद हुईं। साथ ही कई दवा तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है। 


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पुलिस हिरासत में नशे की दवाओं के तस्कर - फोटो : अमर उजाला
तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए और भी कई हथकंडे अपनाए हैं। ये अपने नाम बदलते रहते हैं। पंकज का असली नाम चंद्रकांत है। जयपुरिया गैंग की कमान मिलते ही उसने नाम पंकज और कोड पैंट्रा रख लिया। तस्कर अनिल सिंधी के भी कई नाम है। उसका कोड एएस है। औषधि निरीक्षक नरेश मोहन दीपक ने बताया कि प्रमोद दिल्ली की जेल में बंद है लेकिन यह मुमकिन है कि उसका नाम कुछ और हो। वह नाम बदलता रहता है। पहले उसने प्रदीप नाम रखा था। बुड्ढा उसका कोड वर्ड है।
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तस्कर के गोदाम से बरामद हुईं दवाइयां - फोटो : अमर उजाला
तस्करों की कुंडली तैयार होगी
एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि तस्करों की पूरी कुंडली (हिस्ट्रीशीट) तैयार की जा रही है। इसमें उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे, उनके सभी नाम आदि की जानकारी रहेगी। यह उन जिलों की पुलिस को भी भेजी जाएगी जहां वे तस्करी करते रहे हैं।

 

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तस्करों के गोदाम से बरामद हुई नशीली दवाइयां - फोटो : अमर उजाला
30 से 40 रुपये की गर्भपात किट 500 से 700 में
हरियाणा-राजस्थान में सबसे ज्यादा गर्भपात किट की तस्करी की गई। राजस्थान में गर्भपात किट प्रतिबंधित है। 30 से 40 रुपये कीमत की किट को वहां 500 से 700 रुपये तक में बेचा गया। पीसीपीएनडीटी सेल की मदद से गिरोह के अन्य सदस्यों की जांच की जा रही है।
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babloo kumar ssp
जब्त सरकारी दवाओं में 80 फीसदी एमपी की
तस्करों के घर से मध्यप्रदेश, दिल्ली और यूपी के सरकारी अस्पतालों की दवाएं जब्त हुई हैं। सबसे ज्यादा 80 फीसदी दवाएं मध्यप्रदेश के सरकारी अस्पतालों की हैं। अस्पतालों का स्टाफ तस्करों को दवाएं बेचता था, जिसे रीपैकिंग कर बाजार में खपाया जाता था। 

नशे का कारोबार: पुलिस रडार पर 50 और दवा कारोबारी, तस्करों के मोबाइल में मिले नंबर
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नशे की दवाओं के अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य - फोटो : अमर उजाला
पंजाब में नशे की टेबलेट ज्यादा भेजीं
नशे की दवा, सीरप और टिंचर-जिंजर की तस्करी पंजाब, बिहार, पश्चिमी बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ तक की जा रही है। पंजाब में टैबलेट, बंगाल-बिहार में कफ सीरप-टिंचर की अधिक मांग है। ऑन डिमांड नशे की डोज तैयार कर 10 गुने दाम में बेचते थे।
 
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दवाओं की जांच करते एनसीबी अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
दवाओं के नकली होने की भी आशंका
तस्करों के घर से मिली दवाएं नकली होने की भी आशंका है। जांच में पांच से सात तरह की दवाओं के नाम इंटरनेट और औषधीय पुस्तकों में भी नहीं मिले। फर्जी फर्म बनाकर इनकी सप्लाई होती। रैकेट आठ राज्यों के 55 जिलों में है।
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