स्पेशल जज (एससी-एसटी एक्ट) अनिल कुमार द्वितीय ने डॉ. योगिता गौतम हत्याकांड के आरोपी डॉ. विवेक तिवारी निवासी किदवई नगर, कानपुर का जमानत प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया। वहीं उसके तीन मोबाइल रिलीज करने के लिए दिए गए प्रार्थनापत्र को भी निरस्त कर दिया।
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जूनियर डॉक्टर योगिता गौतम की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली निवासी डॉ. योगिता गौतम एसएन मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही थीं। वह नूरी गेट स्थित एक घर में किराये पर कमरा लेकर रह रही थीं। 18 अगस्त 2020 को वह लापता हुईं थीं। मामले में डॉ. योगिता के भाई ने थाना एमएम गेट में अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें डॉ. विवेक तिवारी को नामजद किया था।
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Yogita Gautam Murder Case
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. योगिता का शव दूसरे दिन डौकी क्षेत्र में मिला था। पुलिस ने आरोपी डॉ. विवेक तिवारी को जेल भेजा था। केस मेें हत्या और सुबूत मिटाने की धाराएं बढ़ाईं थीं। कोर्ट में डॉ. विवेक तिवारी पक्ष की ओर से जमानत प्रार्थनापत्र दिया था।
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योगिता की हत्या का आरोपी डॉक्टर विवेक तिवारी
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वादी पक्ष की ओर से एडीजीसी हेमंत दीक्षित, अधिवक्ता एसएस चौहान और रमाशंकर सिंह राजपूत ने जमानत का विरोध किया। अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि अभियुक्त ने डॉ. योगिता गौतम की हत्या की है। अभियुक्त की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त रिवॉल्वर, कारतूस और खोखा बरामद किया गया। मोबाइल की लोकेशन भी घटनास्थल पर मिली थी। आरोपी के तीन मोबाइल पुलिस ने कब्जे में लिए थे।
योगिता की हत्या का आरोपी डॉक्टर विवेक तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने आदेश में कहा कि तमाम तथ्यों को देखते हुए अभियुक्त की उक्त मामले में भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है। अभियुक्त ने घटना से पहले और बाद में मोबाइल का प्रयोग किया है। मोबाइल की आवश्यकता मुकदमा विचारण के दौरान भी पड़ सकती है। तीनों मोबाइल के क्षतिग्रस्त होने और आवश्यकता पड़ने पर उपलब्ध न होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मोबाइल महत्वपूर्ण साक्ष्य है। अभियुक्त की ओर से सुरेश चंद मालवीय ने मोबाइल रिलीज करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया था, जिसे निरस्त कर दिया गया।