परिस्थितियों के कारण अपनों से अलग होना पड़ा। जीवनसाथी से अलग होने के बाद लगा कि जिंदगी ठहर गई है लेकिन अपराजिताएं खड़ी हुईं और खुद सफलता की डगर तय की। संघर्ष में शिक्षा सहारा बनी। तलाक के बाद इन महिलाओं ने अपना काम शुरू किया। आत्मनिर्भर बनने के दृढ़संकल्प ने रास्ते की बाधाओं को दूर कर दिया। दो महिलाएं ब्यूटी पार्लर की संचालिका हैं तो एक ने अपना ब्यूटी स्टूडियो खोला हुआ है। एक अपराजिता स्कूल की प्रधानाचार्य हैं।
माता-पिता ने दिया साथ, कभी हार नहीं मानी
जीवनसाथी से अलग होने का दर्द कोई दूसरा नहीं समझ सकता। टूट जाते हैं। क्या करेंगे, कैसे करेंगे...सूझता नहीं है। मुश्किलें आईं लेकिन मैंने हार नहीं मानी। दयालबाग निवासी मोना खूबनानी ने इन शब्दों में अपना संघर्ष अमर उजाला से साझा किया।