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स्वतंत्रता दिवस स्पेशल: इन खिलाड़ियों ने ओलंपिक में लहराया तिरंगा, इनके जज्बे को देश का सलाम

Tue, 14 Aug 2018 10:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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indian athelete
ओलंपिक आंदोलन से भारत का रिश्ता 1920 के एंटवर्प ओलंपिक से जुड़ा जहां पहली बार चार भारतीय खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। वर्ष 1900 के पेरिस ओलंपिक में एक एंग्लो-इंडियन नॉर्मन प्रिचार्ड ने एथलेटिक्स में दो रजत पदक हासिल किए थे और कई वर्षों तक तालिका में ये पदक भारत के नाम दर्ज रहे।

प्रिचार्ड कोलकाता में जन्मे थे, लेकिन उनके जीते गए पदक भारतीय पदकों में गिने जाएं या नहीं ये काफी विवाद का विषय रहा है। आइए नजर डालते हैं अब तक के ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर।
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केडी जाधव

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kd jadhav
स्वतंत्र भारत में व्यक्तिगत तौर पर ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी थे केडी जाधव। 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में जाधव ने फ्री स्टाइल कुश्ती में कांस्य पदक हासिल किया था। उस साल भारत को दो पदक मिले थे। पहला हॉकी में स्वर्ण और दूसरा कुश्ती में कांस्य। महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव गोलेश्वर में रहते थे केडी जाधव। वे बचपन से ही खेलों में काफी रुचि रखते थे।

भारत को आजादी मिलने के बाद पहला ओलंपिक लंदन में 1948 में हुआ था। जिसमें जाधव को निराशा ही हाथ लगी। 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में उन्होंने फ्री स्टाइल कुश्ती में तीसरा स्थान हासिल किया। 14 अगस्त 1984 को एक सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई।
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indian hockey team
एक समय था जब ओलंपिक में भारतीय हॉकी की तूती बोलती थी सन् 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से शुरू हुआ भारतीय हॉकी का सुनहरा सफर 1956 के मेलबोर्न ओलंपिक तक बेरोकटोक चला। 112 वर्षों के ओलंपिक इतिहास में भारत के खाते में सिर्फ 15 पदक आए हैं और इनमें से 11 पदक भारत ने हॉकी में जीते हैं।

भारत ने हॉकी में आठ स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य पदक जीते हैं। वर्ष 1928 के एम्सटर्डम ओलंपिक में भारत ने पहली बार स्वर्ण पदक हासिल किया। 1928 से लेकर 1956 तक भारतीय हॉकी ने लगातार छह स्वर्ण पदक जीते। उस दौरान ओलंपिक में भारत ने 24 मैच खेले और 24 में जीत भी हासिल की। भारत ने 1964 के टोक्यो और 1980 के मॉस्को ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था।

लिएंडर पेस

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पेस भूपति - फोटो : getty
लिएंडर पेस और महेश भूपति की जोड़ी बाद में बेहद मशहूर हुई लिएंडर पेस ने वर्ष 1996 के अटलांटा ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ा दी थी। अटलांटा ओलंपिक में उन्हें वाइल्ड कार्ड से प्रवेश मिला था।

अटलांटा में पेस ने अपने सिंगल्स अभियान की शुरुआत ही शानदार अंदाज़ में की और पहले दौर में अमरीका के जाने माने खिलाड़ी रिची रेनबर्ग को पटखनी दे दी। क्वार्टर फाइनल जीत कर तो उन्होंने कमाल ही कर दिया।

सेमीफाइनल में अगासी ने पेस को कोई मौक़ा नहीं दिया और 7-6, 6-3 से मैच जीत कर पेस के साथ साथ उनके करोड़ों समर्थकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। लेकिन पेस ने ब्राजील के फर्नैंडो मेलीजेनी को हराकर कांस्य पदक जीत लिया।
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कर्णम मल्लेश्वरी

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कर्णम मल्लेश्वरी
वर्ष 2000 के सिडनी ओलंपिक में भारत की कर्णम मल्लेश्वरी ने भारोत्तोलन में कांस्य पदक जीतकर पदक तालिका में भारत का नाम जुड़वाया। कर्णम मल्लेश्वरी भारत की पहली और अभी तक एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं, जिन्हें ओलंपिक में कोई पदक मिला है। मल्लेश्वरी ने सिडनी ओलंपिक के 69 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता था।

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में पैदा हुईं कर्णम मल्लेश्वरी ने 12 साल की उम्र से ही भारोत्तोलन का अभ्यास शुरू कर दिया था। भारतीय खेल प्राधिकरण की एक योजना के तहत मल्लेश्वरी को प्रशिक्षण मिला। मल्लेश्वरी को अर्जुन पुरस्कार, खेल रत्न पुरस्कार और पद्म श्री सम्मान भी मिल चुका है।
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राज्यवर्धन सिंह राठौर

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राज्यवर्धन राठौर
वर्ष 2004 के एथेंस ओलंपिक में भारत की ओर से एकमात्र पदक जीतने में सफलता पाई निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौर ने। वर्ष 1998 में ही राठौर ने निशानेबाजी मुकाबले में भाग लेना शुरू किया था। जल्द ही उन्होंने इन मुकाबलों में अपना दमखम दिखाना शुरू कर दिया।

साइप्रस के विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद ही उन्हें एथेंस ओलंपिक में खेलने का अवसर मिला। उन्हें वरीयता क्रम में तीसरा स्थान भी मिला। सिडनी विश्व कप में भी राठौर ने स्वर्ण पदक जीता था। वर्ष 2004 में ही राज्यवर्धन सिंह राठौर को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
 
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अभिनव बिंद्रा

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अभिनव बिंद्रा
अभिनव बिंद्रा के जीतने से भारतीय राष्ट्रीय ध्वज चीन में लहराया गया। भारत के शूटिंग स्टार अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफ़ल में स्वर्ण पदक हासिल किया।

बिंद्रा की यह उपलब्धि किसी करिश्मे से कम नहीं थी क्योंकि ओलंपिक के 112 वर्षों के इतिहास में पहली बार भारत की ओर से किसी व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया। खेल रत्न से सम्मानित बिंद्रा क्वॉलिफाइंग राउंड में चौथे स्थान पर रहे थे। उन्होंने 596 के स्कोर के साथ फ़ाइनल के लिए क्वॉलिफ़ाई किया था। लेकिन अंतिम मुक़ाबले में उन्होंने सबको पीछे छोड़ दिया था।

सुशील कुमार

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sushil kumar - फोटो : pti
सुशील कुमार विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय भी हैं। वर्ष 2008 के बीजिंग ओलंपिक में काँस्य पदक जीत कर पहलवान सुशील कुमार ने भारत में कुश्ती जैसे पारंपरिक और ओलंपिक खेल को एक नई पहचान दी। भारत के सुशील कुमार ने 66 किलोग्राम वर्ग कुश्ती प्रतियोगिता में कजाखस्तान के पहलवान को हराकर कांस्य पदक जीता था।

दिल्ली के नजफगढ़ में 26 मई, 1983 को जन्मे सुशील कुमार के दादा, पिता और बड़े भाई कुश्ती करते थे। इसलिए वो भी सातवीं कक्षा से पहलवानी करने लगे। सुशील ने अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित गुरू सतपाल, यशबीर और रामफल से पहलवानी के गुर सीखे हैं।

विजेंदर सिंह

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विजेंदर सिंह - फोटो : getty
इटली के मिलान शहर में हुई विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भी विजेंदर को कांस्य पदक मिला। बीजिंग ओलंपिक में भारत को पदक दिलाने वाले तीसरे खिलाड़ी विजेंदर सिंह थे जिन्होंने 75 किलोग्राम वर्ग में इक्वेडोर के मुक्केबाज कार्लोस गोंगोरा को 9-4 से हराकर पदक अपने नाम किया था।

हरियाणा के भिवानी जिले के काणुवास गांव से निकलकर विश्वभर में पहचान बनाने वाले विजेंदर सिंह का जन्म 29 अक्तूबर 1985 को हुआ। उनके पिता महिपाल सिंह बैनिवाल हरियाणा रोडवेज़ में ड्राईवर का काम करते हैं और उनकी माँ कृष्णा गृहिणी हैं।

साक्षी मलिक

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साक्षी मलिक - फोटो : twitter
ओलंपिक में पहलवानी में पदक जीतने वाली साक्षी पहली भारतीय महिला हैं। साक्षी हरियाणा की हैं और इससे पहले 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था। साक्षी ने 2002 में अपने कोच ईश्वर दहिया के साथ पहलवानी शुरु की, उन्हें शुरु में विरोध भी झेलना पड़ा। लेकिन आखिरकर 2016 में उनका सपना पूरा हुआ। ओलंपिक में जाने से पहले बीबीसी को दिए इंटरव्यू में साक्षी ने बताया कि वो पिछले 12 सालों से लगातार रोज कम से कम पांच से छह घंटे अभ्यास करती रही हैं।

साइना नेहवाल

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साइना नेहवाल
साइना नेहवाल ने 2012 ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। बैडमिंडन में ओलंपिक मेडल जीतने वाली वो पहली भारतीय महिला खिलाड़ी थीं। वो 2010 के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक भी जीत चुकी हैं। ओलंपिक 2012 में कांस्य पदक के लिए साइना का मैच चीनी खिलाड़ी और उस समय की विश्व नंबर 2 जिंग वैंग से था। वैंग के घायल होने की वजह से साइना को विजयी घोषित किया गया था और उन्हें कांस्य पदक मिला था।

मेरी कॉम

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मैरी कॉम
पांच बार की विश्व चैंपियन मुक्केबाज एमसी मेरी कॉम रियो ओलंपिक में तो नहीं खेल पाईं लेकिन 2012 में उन्होंने लंदन ओलंपिक में भारत को मुक्केबाजी में पदक दिलाया था। उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में चार बार गोल्ड मेडल और 2014 के एशियन गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था।

योगेश्वर दत्त

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yogeshwar dutt
2012 के लंदन ओलंपिक में योगेश्वर दत्त ने जो ब्रोंज मेडल जीता था। सुशील कुमार के बाद वह दूसरे ऐसे पहलवान हैं, जिन्होंने ओलंपिंक पदक हासिल किया है। बता दें कि यह दोनों ही पहलवान मूल रूप से हरियाणा से ताल्लुक रखते हैं।
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गगन नारंग

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गगन नारंग
गगन नारंग ने लंदन ओलंपिक में देश का नाम रोशन किया था। लंदन ओलंपिक की 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भारत के गगन नारंग ने कांस्य पदक जीता है। फाइनल राउंड में वे तीसरे नंबर पर रहे।
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