ओशो के अनुसार हमें अपने आप से प्यार करना चाहिए। जब तक हम अपने आप को प्यार करना नहीं सीखेंगे, तब तक कोई दूसरा हमें पसंद नहीं करेंगा। जिस पल हम अपने आप को स्वीकार करना सीख लेंगे, उस पल आप देखेंगे कि दुनिया आपको पसंद करने लगी है।
ओशो के मुताबिक हमें डर से ऊपर उठना चाहिए। डर एक बंदिश है, जिसके आधार पर व्यक्ति का शोषण किया जाता है। डर में जी रहा व्यक्ति कभी अध्यात्म की तरफ गति नहीं कर पाता है।
ओशो का कहना था कि अगर जीवन में अंधकार है, तो हमें घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि सितारों को देखने के लिए एक निश्चित अंधेरे की जरूरत होती है। अर्थात मुश्किल वक्तों में हमें धैर्य से काम लेना चाहिए क्योंकि इन्हीं परिस्थितियों में हमें सफलता के विकल्पों की पहचान होती है।
ओशो के अनुसार यदि आप पूर्ण हैं तो कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। आगे बढ़ने के लिए सबसे जरूरी है हमारा अपूर्ण होना। अपूर्ण लोग ही नई चीजों को सीखकर आगे बढ़ पाते हैं।
उनके मुताबिक बाहर से हम भले ही अपने आप में कितने भी बदलाव ले आएं, पर हम कभी खुश नहीं होंगे जब तक हम अपने भीतर कोई बदलाव लेकर नहीं आते। उनका कहना था कि सत्य हमारे भीतर ही छुपा है। उसकी तलाश हमें अपने अंदर करनी चाहिए।