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Guru Granth Sahib: संतो की वाणी गुरुवाणी की 7 प्रमुख बातें

Mon, 11 Nov 2019 04:49 PM IST
योगेश जोशी धर्म डेस्क, अमर उजाला
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 गुरु ग्रंथ साहिब
गुरुग्रन्थ साहिब सिख संप्रदाय का प्रमुख धर्मग्रंथ है। इसका संपादन सिख सम्प्रदाय के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जुन देव जी द्वारा किया गया। 16 अगस्त 1604 को हरिमंदिर साहिब अमृतसर में गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश हुआ था। गुरु ग्रंथ साहिब में कुल 1430 पृष्ठ हैं। गुरुग्रन्थ साहिब में सभी धर्मों की वाणी सम्मलित है। इसमे जयदेवजी परमानंदजी जैसे ब्राह्मण भक्तों की वाणी है। साथ ही कबीर, रविदास, नामदेव, सैण जी, सघना जी, छीवाजी, धन्ना की वाणी भी सम्मिलित है। पांचो वक्त की नमाज अदा करने वाले शेख फरीद के श्लोक भी गुरु ग्रंथ साहिब में दर्ज हैं।  इसकी भाषा सरल है और जनमानस को अपनी ओर आकर्षित करती है। गुरु ग्रंथ साहिब को गुरुवाणी भी कहा जाता है। आइए आज हम आपको गुरुवाणी के प्रमुख संदेश बताते हैं... 
 
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जन्म और मृत्यु का चक्र
जन्म- मृत्यु चक्र 
जन्म और मृत्यु का चक्र तब तक खत्म नहीं होता है जब तक अहंकार ओर स्वार्थ खत्म नहीं होता है।
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सोच
सोच
अच्छी सोच से ही इंसान को हमेशा अच्छा रास्ता मिलता है।

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भगवान पर भरोसा
भरोसा
ईश्वर पर वही भरोसा कर सकता है जो खुद पर भरोसा करता हो।
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भगवान
प्रेम  
ईश्वर को वही व्यक्ति प्राप्त कर सकता है, जो सबसे प्रेम करता हो।
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अच्छा व्यक्ति 
अच्छा व्यक्ति 
हमें धर्म के आधार पर बटने से पहले एक अच्छा व्यक्ति बनना चाहिए।
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संसार - फोटो : twitter
संसार
संसार एक भ्रम है, यह हमें हमेशा भ्रम में ही रखता है इसलिए अच्छा है की सपने में ही रहा जाएं।
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जो जैसा बोएगा, वैसा ही पाएगा
कर्म 
इस धरती पर व्यक्ति अपने कर्म के अनुसार ही फल पाएगा। जो जैसा बोएगा, वैसा ही पाएगा। व्यक्ति को अपने कर्म ईमानदारी से करने चाहिए।
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