सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष दिन होता है और भगवान शिव की पूजा सबसे आसान मानी जाती। भोलेनाथ सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता है भी हैं। भोले नाथ की पूजा में न तो लजीज व्यंजन परोसे जाते हैं और न ही मिठाई। भगवान शिव की पूजा में ऐसी चीजें चढ़ाई जाती है जो किसी दूसरे देवता को नहीं चढ़ाई जाती हैं। भोले नाथ को बेलपत्र, धतूरा और एक लोट जल से भी खुश किया जा सकता है।
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शिवलिंग
शिव महापुराण में भगवान शिव को नीलकंठ कहा गया है क्योंकि सागर मंथन के समय भगवान भोलेनाथ ने सागर मंथन से उत्पन्न हालाहल विष को पीकर सृष्टि को तबाह होने से बचाया था। लेकिन विष पीने के बाद इसके प्रभाव से भगवान शिव का गला नीला पड़ गया क्योंकि इन्होंने विष को अपने गले से नीचे नहीं उतरने दिया।
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इसका परिणाम यह हुआ कि विष भगवान शिव के मस्तिष्क पर चढ गया और भोलेनाथ अचेत हो गए। ऐसी स्थिति में देवताओं के सामने भगवान शिव को होश में लाना एक बड़ी चुनौती बन गई। देवी भागवत पुराण में बताया गया है कि इस स्थिति में आदि शक्ति प्रकट हुई और भगवान शिव का उपचार करने के लिए जड़ी बूटियों और जल से शिव जी का उपचार करने के लिए कहा।
भगवान शिव के सिर से विष की गर्मी को दूर करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव के सिर पर धतूरा, भांग रखा और निरंतर जलाभिषेक किया। इससे शिव जी के सिर से विष का दूर हो गया। इस समय से ही भगवान शिव को धतूरा, भांग और जल चढ़ाया जाने लगा।