कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है।गोवर्धन पर्वत को गिरिराज महाराज के नाम से जाना जाता है और इन्हें साक्षात श्री कृष्ण का स्वरूप माना गया है। यह घटना उस समय हुई थी जब इंद्र के कोप से गोकुल वासियों को बचाने के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था।
पढ़ें- Govardhan puja 2017: जब भगवान कृष्ण ने तोड़ा था इंद्र का घमंड,जानिए पूरी कथा
विज्ञापन
2 of 4
बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इस घटना के पीछ हनुमान जी का भी हाथ था। दरअसल पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में जब भगवान राम ने अवतार लिया था उस समय लंका पार करने के लिए जब भगवान राम के नेतृत्व में वानर सेना समुद्र पर सेतु का निर्माण कर रही थी उस समय इसके लिए बहुत से पत्थरों की जरूरत हुई।
विज्ञापन
3 of 4
हनुमान जी हिमालय पर गए और एक पर्वत वहां से उठाकर समुद्र की ओर चल पड़े। मार्ग में पता चला कि सेतु का निर्माण हो गया है तो हनुमान जी ने पर्वत को वहीं जमीन पर रख दिया। पर्वत ने कहा कि मैं न तो राम के काम आया और न अपने स्थान पर रह सका।
पर्वत की मनोदशा समझकर हनुमान जी ने कहा कि द्वापर में जब भगवान राम श्री कृष्ण के रूप में अवतार लेंगे उस समय वह आपको अपनी उंगली पर उठाकर देवता के रूप में प्रतिष्ठित करेंगे। इस तरह हनुमान जी ने गोवर्धन को देवता बनाने की लीला रची।