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चाणक्य नीति: इन लोगों के घरों में स्वयं चली आती हैं मां लक्ष्मी, आप भी अपनाएं ये आदतें

Tue, 22 Jun 2021 09:41 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
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आचार्य चाणक्य - फोटो : social media
आचार्य चाणक्य को विभिन्न विषयों का गहन ज्ञान था। ये एक कुशल कूटनीतज्ञ, राजनीतिज्ञ और बुद्धिजीवी थे। इसके साथ ही ये अर्थशास्त्र के मर्मज्ञ थे। इसी कारण इन्हें कौटिल्य और विष्णु गुप्त भी कहा जाता था। इन्हें न केवल किताबी विषयों का बल्कि जीवन की अच्छी और बुरी दोनों तरह की परिस्थितियों का अनुभव था। इन्होंने अपने जीवन में हर तरह की परिस्थितियों का सामना करते हुए भी कभी हार नहीं मानी और न ही कभी अपना धैर्य खोया बल्कि इन्होंने अपनी कुशल नीतियों और बुद्धिमत्ता के बल पर नंदवंश का नाश करके चंद्रगुप्त को मौर्य सम्राज्य का शासक बनाया। ये एक श्रेष्ठ विद्वान और महान विभूति थे। इसी के साथ ये एक योग्य शिक्षक भी थे। इन्होंने विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी और वहीं पर आचार्य के पद पर रहकर विद्यार्थियों को शिक्षा भी प्रदान की। इनके द्वारा लिखे गए नीतिशास्त्र की बातें आज भी बहुत लोकप्रिय हैं। आचार्य चाणक्य ने ऐसे कार्यों के बारे में बताया है जिनकों करने से आपके घर में किसी प्रकार का अभाव नहीं होता है। ऐसे घरों में सदैव मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। तो चलिए जानते हैं कि क्या कहती है चाणक्य नीति।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
जहां होता है ज्ञानियों का सम्मान
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिन घरों में ज्ञानियों का सम्मान किया जाता है वहां मां लक्ष्मी स्वयं पधारती हैं। ज्ञानी व्यक्ति आपको सही राह पर चलने को प्रेरित करते हैं तो वहीं मूर्खों के कारण आप समस्याओं से घिर सकते हैं, इसलिए कहा गया है कि मूर्खों की हां में हां मिलाने या फिर उनकी प्रशंसा से प्रसन्न होने के बजाय ज्ञानी व्यक्ति की डांट सुनना आपके लिए लाभप्रद रहता है। मनुष्य को सदैव ज्ञानी लोगों की संगति करनी चाहिए और उनका भलिभांति सम्मान करना चाहिए।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
अन्न का सम्मान
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जिन घरों में अन्न का भंडारण उचित रुप से किया जाता है और सदैव अन्न का सम्मान किया जाता है वहां कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं होती हैं। ऐसे घरों के भंडार सदैव भरे रहते हैं और ऐसे घरों में मां लक्ष्मी अपनी कृपा बरसाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अन्न को ब्रह्मा का रुप माना गया है इसलिए कभी भी अन्न का अत्यधिक उपभोग नहीं करना चाहिए। जो लोग अन्न का सम्मान नहीं करते हैं उसकी बरबादी करते हैं वहां पर कभी भी मां लक्ष्मी और अन्न पूर्णा का वास नहीं होता है।
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media
पति-पत्नी के बीच समर्पण भाव
जिस घर में पति-पत्नी प्रेम पूर्वक रहते हैं और एक दूसरें का सम्मान करते हैं। जिन घरों में सदैव शांति का वातावरण रहता है मां लक्ष्मा वहां स्वयं पधारती हैं। इसके उलट जिन घरों में एक दूसरे का सम्मान नहीं किया जाता है, पति-पत्नी बात-बात पर झगड़ते रहते हैं वहां दरिद्रता का वास होता है इसलिए घर में सदैव शांति का वातावरण रखना चाहिए और पति-पत्नी को एक दूसरे के साथ सामंजस्य बिठाकर चलना चाहिए।
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